शिक्षा सत्र शुरू होने में तीन दिन बचे हैं। लेकिन जिले के अधिकांश परिषदीय विद्यालयों में रंगाई-पुताई का काम पूरा नहीं हो सका है। हालांकि शासन से बजट जारी हुआ है लेकिन प्रधानाध्यापक इस राशि को कम बता रहे। उधर, बीएसए ने माह के अंत तक रंगाई-पुताई न करा पाने वाले प्रधानाध्यापकों का वेतन रोकने का फरमान जारी कर दिया है। बावजूद इसके प्रधानाध्यापक मामले को गंभीरता से नहीं ले रहे।
जिले में 1502 परिषदीय विद्यालय हैं। निजी स्कूलों को आकर्षक बनाने से लेकर आधुनिक सुविधाएं बहाल करने को लेकर स्कूल संचालकों में जहां होड़ लगी है। वहीं परिषदीय विद्यालयों में सुविधाएं बहाल करना तो दूर विद्यालयों के भवनों की रंगाई-पुताई तक नहीं कराई जा सकी है। शासन की ओर से विद्यालयों में शत प्रतिशत नामांकन तथा सुविधाएं बढ़ाने के लिए सभी उपाय किए जा रहे हैं। वहीं विभाग की ओर से सिर्फ कागज पर ही सब कुछ नजर आ रहा है। शिक्षा सत्र शुरू होने में तीन दिन ही शेष रह गए हैं। लेकिन तैयारी के नाम पर सब शून्य है। शासन की ओर से रंगाई पुताई सहित अन्य कार्यों के लिए पांच हजार से 7500 रुपये प्रत्येक विद्यालयों में विद्यालय विकास अनुदान के खाते में महीनों पूर्व ही भेज दिया गया है। विभागीय लापरवाही की स्थिति यह है कि धन जारी होने के बाद भी अधिकांश विद्यालयों की पुताई का कार्य पूरा नहीं किया जा सका है। कई प्रधानाध्यापकों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि मजदूरी व मैटेरियल का दाम बढ़ने से बेहतर ढंग से रंगाई पुताई संभव नहीं हो पा रहा है।
पिपरीडीह : क्षेत्र के ताजपुर पतिला, बबुआपुर, रैकवारडीह प्रथम, द्वितीय तथा तृतीय, भार, ओन्हाइच, खरगजेपुर, कहिनौर सहित विभिन्न इलाकों के परिषदीय विद्यालयों के भवनों की रंगाई पुताई नहीं कराई जा सकी है। भवनों की रंगाई पुताई कब तक हो जाएगी न तो अधिकारी न ही शिक्षक बताने को तैयार है। यही हाल अन्य ब्लाक क्षेत्रों का है।
इस बाबत जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी ओपी त्रिपाठी का कहना है कि 30 जून तक जिले के समस्त परिषदीय विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों को विद्यालय भवनों की रंगाई पुताई कराने का निर्देश दिया गया है। रंगाई पुताई कराकर फोटोग्राफ कार्यालय में जमा कराना होगा। अन्यथा वेतन रोक दिया जाएगा।