कोपागंज। क्षेत्र के सहरोज गांव में चल रहे संगीतमय श्री भागवत कथा के प्रथम दिन कथा वाचक अनुपानंद जी महराज ने कहा कि बिनु परतीती होई नहीं प्रीति अर्थात माहात्म्य ज्ञान के बिना प्रेम चिरंजीव नहीं होता, अस्थायी हो जाता है। भागवत कथा में जीवन का सार तत्व मौजूद है। आवश्यकता है निर्मल मन ओर स्थिर चित्त के साथ कथा श्रवण करने की। भागवत श्रवण से मनुष्य को परमानंद की प्राप्ति होती है। उन्होंने धुंधकारी चरित्र पर प्रकाश डालते हुए कहा कि आत्मसात कर लेें तो जीवन से सारी उलझने समाप्त हो जाएंगी। द्रौपदी, कुंती महाभागवत नारी है। कुंती स्तुति को विस्तारपूर्वक समझाते हुए परीक्षित जन्म एवं शुकदेव आगमन की कथा सुनाई। अंत में संगीत एवं झांकी ने सबको कृष्ण रंग में सराबोर कर दिया। पश्चात गौकर्ण की कथा सुनाई गई। इसी क्रम में शास्त्री जी महाराज ने कहा कि भगवान की लीला अपरंपार है। वे अपनी लीलाओं के माध्यम से मनुष्य और देवताओं के धर्मानुसार आचरण करने के लिए प्रेरित करते हैं। कहा कि भागवत श्रवण से प्रेतयोनि से मुक्ति मिलती है। चित्त की स्थिरता के साथ ही श्रीमद्भागवत कथा सुननी चाहिए। भागवत श्रवण मनुष्य केे संपूर्ण क्लेश को दूर कर भक्ति की ओर अग्रसर करती है। कहा कि मनुष्य जब अच्छे कर्मों के लिए आगे बढ़ता है तो संपूर्ण सृष्टि की शक्ति समाहित होकर मनुष्य के पीछे लग जाती है। हमारे सारे कार्य सफल होते हैं। ठीक उसी तरह बुरे कर्मों की राह के दौरान संपूर्ण बुरी शक्तियां हमारे साथ हो जाती है। मनुष्य को निर्णय करना होता है कि उसे किस राह पर चलना है। छल ओर छलावा ज्यादा दिन नहीं चलता। कथा के पहले दिन भगवान के विराट रूप का वर्णन किया गया। इसे सुन श्रद्धालु भाव विभोर हो गए। भजन, गीत व संगीत पर श्रद्धालु देर तक झूमते रहे। इस अवसर पर शशि प्रकाश राय, प्रधान प्रतिनिधि योगेश राय, इंदुशेखर राय, नागेंद्र, राकेश राय, विष्णु, मनोज, अवधेश, अच्छेलाल साहनी, अमित, सुमित आदि मौजूद रहे।