एक जनपद एक नदी योजना के तहत खड़िया नाला के पुनरुद्धार के लिए शासन से 11.90 लाख रुपये स्वीकृत किए गए हैं। सिल्ट सफाई के लिए टेंडर भी हो चुका है। बीते मार्च माह में जिला गंगा समिति और मुख्य विकास अधिकारी ने निरीक्षण किया था।
पुनरुद्धार कार्य से गाढ़ा, जोगापुर, दतौड़ा, मुबारकपुर, कुंवारीडीह, नगवा, बीबीपुर, सिधवल, बिलौवा, गोबरिया, खालिसपुर, इसहाकपुर, बखरिया, मुस्तफाबाद, मड़ैली, सेहबरपुर, पिलखी वरुणा, रेहिया, अरदौना, इटौरा, पृथ्वीपुर, मखना, मझौवा, पिंडोहरी, पिपरसाथ सहित लगभग 30 गांवों के किसानों को खरीफ और रबी की फसलों की खेती में लाभ होगा।
रतनपुरा ब्लॉक के गाढ़ा ताल में गिरने वाले खड़िया नाला और आसपास की स्थिति बदलने की उम्मीद है। जिला गंगा समिति की निगरानी में सात विभाग अपने-अपने स्तर से कार्य कराएंगे।
इससे गाढ़ा ताल में गिरने वाले गंदे पानी को स्वच्छ किया जाएगा। नाले से अतिक्रमण हटाया जाएगा और किनारों पर पौधरोपण कराया जाएगा, जिससे पर्यावरण बेहतर हो सके।
किनारे स्थित खेतों के किसानों को जैविक खेती अपनाने के लिए प्रशिक्षित किया जाएगा, ताकि रासायनिक खाद बारिश के पानी के साथ बहकर ताल तक न पहुंचे। यह नाला दोहरीघाट की ओर से निकलकर गाढ़ा ताल में मिल जाता है। इसकी कुल लंबाई 9.2 किलोमीटर और चौड़ाई लगभग 6 फीट है।
सिल्ट सफाई की स्वीकृति जिलाधिकारी की अध्यक्षता में जिला स्तरीय समिति से 30 अप्रैल को दी गई थी और इसका टेंडर सिंचाई विभाग द्वारा किया गया है। सरयू नदी का बाढ़ का पानी भी इसी नाले से होकर ताल में पहुंचता है।
वर्तमान में स्थिति यह है कि 100 से अधिक गांवों के घरों से निकलने वाला गंदा पानी इसमें गिरता है। रतनपुरा, दतौड़ा और मुबारकपुर ग्राम पंचायतों में अतिक्रमण की स्थिति भी बनी हुई है।
रतनपुरा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र से निकलने वाला मेडिकल वेस्ट भी किनारे फेंका जाता है, जिसे कई बार आग के हवाले कर दिया जाता है। कई स्थानों पर कचरा डंप किया जाता है, जो बारिश के समय बहकर ताल में पहुंचता है।
नाले के संरक्षण के लिए जिला गंगा समिति ने सात विभागों की समिति गठित की है। मुख्य विकास अधिकारी को इसका नोडल बनाया गया है। जिला पंचायतीराज अधिकारी, जिला कृषि अधिकारी, अधिशासी अभियंता सिंचाई विभाग, वन विभाग, डीसी मनरेगा, श्रम विभाग और भूगर्भ जल विभाग को सदस्य बनाया गया है। ये सभी विभाग आवश्यकतानुसार अपने-अपने स्तर पर कार्य कराएंगे।