फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

बीमारी की हालत में रोजा नहीं रखने की छूट

विज्ञापन
विज्ञापन
रमजान का महीना रहमतों, बरकतों, तक़वा और परहेजगारी का है। इस महीने रहमतों की बारिश होती है। इस्लाम में हर बालिग पर रोजा फर्ज किया गया है। लेकिन बीमार लोगों को छूट भी दी गई है। बीमारी के बाद उन्हें छूटे हुए रोजे रखने होंगे। अगर ऐसा नहीं किया जाता है तो वह गुनाह के भागीदार होंगे।
विज्ञापन

मौलाना लईक उस्मानी फिरोजपुरी कहते हैं कि अगर कोई बीमार या सफर में हो और रोजा न रख सके तो वह बाद में छूटा हुआ रोजा रख सकता है। अगर बीमारी से रोजा रखने की ताकत न हो तो उसका फिदया अदा करे। इसके तहत एक गरीब को दोनों वक्त भरपेट खाना खिलाए या फिर इसके बदले रकम अदा करे। मौलाना ने बताया कि रोजा का मक़सद तक़वा और परहेजगारी है, सभी गुनाहों से बचना है। रोजा ताजकिया नफुस व क्लब के सलाह का जरिया है। कुरान शरीफ में इस माह की विशेष फजीलत बयान की गई है। इस पाक माह में अल्लाह तआला जन्नत का दरवाजा खोल देते हैं और दोजख का दरवाजा बंद कर शैतान को कैद कर लिया जाता है। हर नेकी बदला 70 गुना दिया जाता है। अल्लाह तआला को रोजेदार के मुंह की बदबू मुश्क की खुश्बू से भी बेहतरीन लगती है। मौलाना ने बताया कि रमजान का दूसरा अशरा शुरू हो चुका है। लिहाजा रोजा रख कर अल्लाह तआला से अपने गुनाहों से माफी मांगनी चाहिए।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें