जिले के अधिकांश सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों में बायोमेट्रिक अटेंडेंस सिस्टम रिपोर्ट की मानीटरिंग नहीं की जा रही है। इसके चलते शिक्षकों और शिक्षणेत्तर कर्मचारियों की मनमानी से शिक्षण व्यवस्था पर असर पड़ रहा है। प्रबंधकों की शिकायत के बाद भी लेखा अनुभाग अटेंडेंस रिपोर्ट का अवलोकन किए बिना ही वेतन जारी कर दे रहा। उधर, विभागीय अधिकारी नियम के तहत वेतन जारी करने का दावा कर रहे हैं।
जिले में 67 सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों में लगभग 40 हजार छात्र अध्ययनरत हैं। इन कालेजों में 628 शिक्षकों तथा 1100 शिक्षणेत्तर कर्मचारी की तैनाती है। कालेजों में तैनात शिक्षकों तथा शिक्षणेत्तर कर्मचारियों की उपस्थिति पर नजर रखने के लिए शासन की तरफ से एक अप्रैल 2017 से बायोमेट्रिक अटेंडेंस सिस्टम लागू किया गया। कुछ दिनों तक तो यह ठीक चला, लेकिन विभाग की तरफ से सिस्टम रिपोर्ट की मानीटरिंग की अनदेखी की जाने लगी। ऐसे में शिक्षकों की मनमानी से पठन पाठन पर असर पड़ने लगा। कालेजों के प्रबंधकों की मानें तो विभाग की तरफ से न तो बायोमेट्रिक अटेंडेंस सिस्टम रिपोर्ट और न ही उपस्थिति पंजिका का अवलोकन किया गया। कार्रवाई की संस्तुति के बाद भी लेखा अनुभाग से वेतन जारी कर दिया जाता है। बालक बालिका इंटर कालेज काझा, गुजराती देवी इंटर कालेज फत्तेपुर, इंटर कालेज नदवासराय के प्रबंधकों ने कई बार शिकायत भी दर्ज कराई। लेकिन मामले को गंभीरता से नहीं लिया जा सका है। यह तो बानगी है। ऐसे ही तमाम अन्य विद्यालय हैं।
इस बाबत जिला विद्यालय निरीक्षक डॉ. केसी भारती का कहना है लापरवाह शिक्षकों तथा शिक्षणेत्तर कर्मचारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। कहा कि बायोमेट्रिक अटेंडेंस सिस्टम की मानीटरिंग की जाती है। साथ ही नियम के तहत वेतन भुगतान किया जाता है।