बढुआ गोदाम । मानसून आने से पहले ही किसानों ने धान की नर्सरी डालना शुरू कर दिया है । कुछ किसानों ने तो पानी की कमी को देखते हुए संडा विधि से धान की रोपाई के लिए महीनों पहले ही धान की नर्सरी डाल दिया है । ऐसे में नर्सरी प्रबंधन पर किसानों को विषेश ध्यान देने की जरूरत है ।
कृषि विज्ञान केंद्र पिल्खी के वैज्ञानिक डा. एनपी सिंह ने बताया कि धान के बीज भिगोने से लेकर खेत की तैयारी के साथ बीज छिड़काव करने के साथ नर्सरी में रोग और कीट नियंत्रण को लेकर किसानों को सचेत रहने की आवश्यक हैं। बोले नर्सरी डालने से पहले बीज को उपचारित करना आवश्यक हैं । बीज को उपचारित करने से बीज का अंकुरण ठीक होता साथ ही पौधों को झुलसा रोग से बचाया जा सकता हैं । बीज को उपचारित करने के लिए किसान एक किलों धान की बीज में दो से तीन ग्राम थीरम या कारबेनडाजिम दवा से धान की बीज शोधित कर सकते है। नर्सरी डालते समय किसान अपनी खेत की गहरी जुताई करने के साथ ही उसमें गोबर की खाद डालकर उसमे दो दिन तक पानी भर दे । किसान धान की बीज को 24 घंटे पानी में भिगोने के बाद धान की बीज को ठंडी जगह पर निकाल कर फैला दे । बीज से पानी को सुखा ले । खेत तैयार होने पर शाम के समय ठंडे मौसम में बीज को खेत में छिड़काव कर दे । नर्सरी तैयार होने के 21 दिन बाद संडा विधि से नर्सरी की रोपाई कर दे। एक माह में जब संडा विधि से पौधा तैयार होता है तो उसकी रोपाई कर दें।