क्षेत्र के ओन्हाइच गांव में चल रहे शतचंडी महायज्ञ के सातवें दिन गुरुवार को श्रद्धालुओं का रेला लगा रहा। श्रद्धालुओं ने विधि विधान से हवन पूजन कर यज्ञ स्थल की परिक्रमा कर पुण्य प्राप्त किया। इस मौके पर पं. हरिशंकर महाराज ने कहा कि भगवान हर जगह तथा कण-कण में मौजूद हैं। बस जरूरत उन्हें महसूस करने की है।
उन्होंने कहा कि मोक्ष की प्राप्ति के लिए इंसान कई प्रकार के प्रयास करता है, परंतु वह यह भूल जाता है कि भगवान केवल भक्ति से मिलते हैं। उन्होंने कहा कि हवन का अपना विशेष महत्व होता है। हवन से न केवल पर्यावरण शुद्ध होता है, बल्कि हवन में आहुति डालने पर मनुष्य को विशेष अनुभूति की प्राप्ति होती है। वास्तव में जीव का सुख साक्षात ईश्वर है। इनको प्राप्त करने के बाद जीव सुख का अनुभव करता है। परमात्मा का एक नाम आत्रनंद है। इनकी प्राप्ति हो जाने से जीव आनंदित हो जाता है।
अंत में भगवान भगवान कृष्ण की बाल लीला सुनाते हुए कहा कि पृथ्वी पर अन्नाय व राक्षस के बढ़ते प्रकोप को लेकर ऋषि मुनियों के भय दूर करने के लिए मां दुर्गा शक्ति महामाया देवी यानि देवकी के गर्भ में श्रीकृष्ण को भेजा। वासुदेव के अंदर परमात्मा की शक्ति के कारण कारागार में ही श्रीकृष्ण का जन्म हुआ। इस मौके पर भानु सिंह, राधेश्याय सिंह, मंटू, अभय नारायण, काशीनाथ, ध्रुव मौर्य, दीनदयाल, सुनील आदि शामिल रहे।