अमिला क़स्बा स्थित प्राथमिक विद्यालय (डीहबाबा) परिसर में चल रहे पांच दिवसीय मानस सम्मलेन के तीसरे दिन मंगलवार की शाम
अयोध्या से आए हुए वक्ता रमेश दास रामायणी ने कहा कि जीव के उद्धार के लिए इस कलियुग में ईश्वर भक्ति से बढ़कर और कोई रास्ता नहीं है। भक्ति के लिए सत्संग आवश्यक है, जो मार्ग दर्शन का कार्य करता है। अयोध्या से आए कथाकार मधुसूदन शास्त्री ने भाई-भाई के संबंध पर बल दिया। यदि रामचरित मानस के अनुसार जीवन यापन और परिवार का संचालन हो संसार समस्या विहीन हो जाएगा। मानस वक्ता उमाकांत ओझा ने जीव और भक्ति पर प्रकाश डाला। भोजपुरी गीत कलाकार अभिषेक वर्मा ने भजन गीतों से शमा बिखेरी। कथा के अंत में श्रीराम चरितमानस की आरती का प्रसाद वितरण हुआ। इस दौरान राम प्रसाद कुशवाहा, अखिलेश्वर शुक्ल, शिवनाथ साहु, अशोक कुमार ओझा, रामधनी मौर्य, शिवम, विवेक, उमेश आदि उपस्थित रहे