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तपिश से जनजीवन बेहाल, सभी को बारिश का इंतजार

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मधुबन। रोहिणी बरसे मृगटा तपे कुछ दिन आद्रा जाय, कहे घाघ सुन घाघीनी स्वान दूध भात नहीं खाय। जी हां महाकवि घाघ की कहावत अब चरितार्थ होने लगी है। मृगटा नक्षत्र के तपन से लोंगो का बुरा हाल है। इतनी भयानक गर्मी में एसी और कूलर भी राहत नहीं दे पा रहे हैं। लोग पेड़ों के छांव तले, या इधर उधर किसी तरह जिंदगी काट रहे है। सबसे बुरा हाल पशु पक्षियों का है। गर्मी की तपन से परेशान पशु पक्षी भी ठांव की तलाश में इधर उधर भटक रहे है।
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गनीमत यह है कि रोहिणी नक्षत्र में कुछ बारिश होने से गढ्ढों में पानी अभी भरा है, नहीं तो ये जानवर पानी के अभाव में भी दम तोड़ देते। हालांकि इस कहावत के अनुसार तपन के बाद अच्छी बरसात के संकेत भी दिए गए हैं जिसका किसानों और अन्य लोगों को बेसब्री से इंतजार है। पिछले दो माह से गर्मी और तेज धूप ने आम लोगों का जनजीवन अस्त व्यस्त करके रख दिया है। हालांकि पिछले महीने रोहिणी नक्षत्र में कुछ कुछ बारिश होने से दो चार दिन लोंगो को गर्मी से राहत जरूर मिली लेकिन अब उस बरसात का खामियाजा लोगों को ऊपर से आग और नीचे धरती की तपन और उमस दोनों से उठाना पड़ रहा है। क्षेत्र में पेंड़ों की अंधाधुंध कटाई से बाग बगीचे भी सुनसान है। नहीं तो लोग पहले गर्मी से निजात पाने के लिये बाग बगीचों में शरण ले लेते थे।
बड़े बुजुर्गों की माने तो 15 जून से बरसात का समय माना जाता है अब जबकि वह भी पूरा होने को है, लेकिन बारिश का लक्षण दूर दूर तक नही दिखाई दे रहा है। मौसम विभाग अभी मानसून आने में दस से पंद्रह दिन का समय बता रहा है। ऐसी स्थिति में लोगों को अभी गर्मी से राहत मिलती नहीं दिखाई दे रही है। इसके उलट घाघ कवि की कविताओं को माने तो इस तपन का लाभ इस वर्ष किसानों को मिलने वाला है। धान की रोपाई के बाद खूब बरसात होने की संभावना है, क्योंकि जितना मृगटा नक्षत्र तपेगी बारिश के लिये अनुकूल मौसम रहेगा। बहरहाल, मौसम इतना गर्म है कि लोंगो को बिना बारिश के राहत मिलती नजर नहीं आ रही है।
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