दीपावली में मिठाइयों बगैर रौनक ही नहीं। मगर बाजार के कुछ मिठाई कारोबारी इसका बखूबी फायदा उठा रहे है। चांदी वर्क की जगह एल्युमीनियम वर्क से सजी मिठाइयां बेच रहे हैं। यहीं नहीं मिठाइयों में हर्बल रंग के जगह मिलावटी रंगों का प्रयोग धड़ल्ले से हो रहा है। जिले में इस गोरखधंधे की पोल विभाग द्वारा भेजे गए नमूनों की परीक्षण रिपोर्ट में खुली हैं। खाद्य सुरक्षा विभाग द्वारा भेजे गए 13 नमूनों में एल्युमीनियम वर्क, केमिकल, रासायनिक रंगों का प्रयोग होना पाया गया है। विभाग दोषी दुकानदारों के विरुद्ध कार्रवाई की तैयारी में जुटा हुआ है।
सदर तहसील, मधुबन, मुहम्मदाबाद गोहना और घोसी तहसील के नौ ब्लाकों में खाद्य औषधि विभाग में 500 मिठाइयों की दुकानें पंजीकृत है। विभाग द्वारा मिलावट को लेकर 2016-17 में 200 दुकानों पर छापा मार कार्रवाई कर 250 सैंपल लिए गए थे। वहीं 2017-18 में विभाग ने 200 दुकानों से 236 नमूने लिये गये थे। पिछले माह लैब से 256 सैंपल की रिपोर्ट भेजी गई थी। जिसमें 142 सैंपल लैब की जांच में मिलावटी पाए गए थे। इनमें चार मामलों में बर्फी, मावा की मिठाईयों पर एल्युमीनियम वर्क पाये गये। वहीं दो सैंपल में हर्बल रंग की जगह अमानक रंग का प्रयोग होना पाया गया। वहीं, सरसों के तेल में भी मिलावट मिली। विभाग अब तक 25 कुंतल से ज्यादा मिलावटी मिठाई जब्त कर नष्ट कर चुका है। इसके साथ ही 12 से अधिक नमूने जांच के लिए लैब को भेजे जा चुके हैं। इस बाबत जिला खाद्य सुरक्षा अधिकारी एसके त्रिपाठी का कहना है मिलावट वाले नमूनों पर संबंधित दुकानदारों पर कार्रवाई की जाएगी।
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ग्रामीण क्षेत्रों में फलफूल रहा मिलावटी मिठाई कारोबार
मऊ। विभागीय अधिकारी खुद इस बात को मानते है जिले में मिलावटी मिठाई का कारोबार घोसी, मझवारा, रानीपुर, बोझी, इंदारा, रतनपुरा, दोहरीघाट, चिरैयाकोट, वलीदपुर, मुहम्मदाबाद कस्बा स्थित अधिकांश दुकानदारों द्वारा चांदीवर्क की जगह मिठाईयों को आर्कषक बनाने के लिए एल्युमीनियम वर्क का प्रयोग करते है।
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गुर्दो पर पड़ता है सीधा असर
मऊ। जिला अस्पताल के फिजिशियन डा. अनिल कुमार कहते हैं कि मिक्स रंग और एल्युमीनियम वर्क (हैवी मैटल) की मिठाइयों के सेवन से पेट की बीमारी के साथ व्यक्ति के गुर्दे पर असर पड़ता है।