अमिला। माता पिता से आशीर्वाद लेकर वन के लिए श्रीराम, लक्ष्मण और सीता के प्रस्थान करते ही पूरी अयोध्या गमगीन हो उठी। लीला में यह दृश्य देख रहे श्रद्धालु भक्त भाव विह्वल हो उठे। श्री ठाकुरद्वारा रामलीला समिति के तत्वावधान में चल रही रामलीला में राम वनगमन सहित विभिन्न लीलाओं की मनोहारी प्रस्तुति की गई।
भगवान राम के राज्याभिषेक की सूचना मिलते ही कैकेयी की प्रिय दासी मंथरा ने कूटनीति के तहत कैकेयी को समझाने लगी। तेरे पुत्र भरत के साथ अन्याय हो रहा है। राम को अयोध्या का राजा बनाया जा रहा है। भरत शत्रुघ्न को ननिहाल भेज दिया गया। कैकेई ने मंथरा को बहुत ही धिक्कारा, परंतु अंत में मंथरा ने पुत्र राजमोह दिखा कर रानी कैकेयी को मनाने में कामयाब हो गई। दशरथ द्वारा कैकेई मनावन तथा कैकेयी के जिद्द पर राम वनगमन का दृश्य देख दर्शक भावविह्वल हो उठे। इस दौरान राजा दशरथ मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम को पुन: समझाने का प्रयास करते हैं कि वन न जाएं। लेकिन श्रीराम उनसे आशीर्वाद लेकर सीता, भ्राता लक्ष्मण के साथ वन को प्रस्थान कर जाते हैं। वही सुमंत को दशरथ समझाते हैं कि राम को किसी तरह दो चार दिन वन में घूमा कर समझाकर वापस लेकर चले आना। प्रभु को वनवासी वेष में देख अयोध्या वासी द्रवित हो गए। उन्होंने प्रभु का मार्ग अवरुद्ध कर दिया और हाथ जोड़ वन न जाने की विनती करने लगे। प्रभु के प्रति भक्तों के इस अगाध प्रेम को देख अत्यंत मार्मिक प्रसंग की प्रस्तुति देख दर्शकों की आंखें नम हो गई।