घाघरा नदी खतरे के लाल निशान से 40 सेमी ऊपर बह रही है। जबकि कटान के चलते दुर्गा मंदिर की सुरक्षा में लगे पेड़ नीचे की ओर झुक गए हैं। नदी की लहरें डीह बाबा के मंदिर से लेकर श्मशान घाट तक करीब 90 मीटर तक बैकरोलिंग कर रही है, जिससे कटान का खतरा बढ़ गया है। 24 घंटे में नदी के जलस्तर में पांच सेमी की कमी दर्ज की गई है। वहीं, सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता ने बैकरोलिंग वाले क्षेत्रों को सुरक्षित करने का दावा किया है।
नदी का जलस्तर रविवार को 70.30 मीटर रहा। शनिवार को यह 70.35 मीटर पर था। इस तरह 24 घंटे में घाघरा के जलस्तर में पांच सेमी का घटाव दर्ज किया गया। नदी के जलस्तर में कमी होने के बाद भी रौद्र रुप धारण करने से लोग दहशत में हैं। डीह बाबा का मंदिर, जानकी घाट पर घाघरा का लगातार दबाव बढ़ता जा रहा है। जिससे लोग दहशत में जी रहे हैं। नदी की लहरें मुक्तिधाम पर स्थित भारत माता मंदिर, सरस्वती मंदिर तथा श्मशान घाट पर टकरा रही है। नगर की सुरक्षा के लिए अरसे से डीह बाबा से लेकर श्मशान घाट तक पीचिंग कराने की मांग चल रही है, लेकिन मामले को लटका दिया गया है। घाघरा का अतिसंवेदनशील गांव धनौली रामपुर के सामने करीब 100 मी की दूरी में नदी की तेज उफनाती लहरे बैकरोलिंग कर रही है। जिससे नदी के तह के नीचे से कटान होने की संभावना है। तटवर्ती इलाके के दर्जनों गांवों की हजारों एकड़ फसल 15 दिनों से जलमग्न हैं। इससे पशुओं के चारे की समस्या उत्पन्न हो गई है। धनौली लोहड़ा, नौली रिंग बंधा तथा बीबीपुर बंधे पर पानी का दबाव लगातार बढता जा रहा है। नदी खतरा बिंदु से 40 सेमी ऊपर बह रही है। इस बाबत सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता वीरेंद्र पासवान का कहना है कि बैकरोलिंग के जद में आने वाली धरोहरों को सुरक्षित कर दिया गया है।