मऊ। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट लोकेश नागर ने मारपीट कर गंभीर चोट पहुंचाने के 32 वर्ष पुराने मामले में नामजद सात आरोपियों में चार को दोषी पाते हुए उन्हें तीन-तीन वर्ष की सजा सुनाई। साथ ही चारों पर 2750 रुपये का जुर्माना लगया।
मधुबन थाना क्षेत्र के पकड़ी गांव निवासी इंद्रदेव यादव पुत्र राम नारायण की तहरीर पर 24 जून 1986 को थाने में रिपोर्ट दर्ज हुई थी। इसमें वादी मुकदमा इंद्रदेव ने बताया कि 24 जून को आरोपी अलसुबह आबादी की जमीन में दीवाल जोड़ने लगे। उसके भाई चंद्रदेव यादव ने जब विरोध जताया तो गांव निवासी पांचू यादव पुत्र शुभग, हरदेव पुत्र उदित यादव, वीरेंद्र पुत्र हरदेव यादव, सुरेश पुत्र हरदेव यादव, रजौती पत्नी पांचू, ललिता पुत्री उदित और उर्मिला पुत्री हरदेव एक राय होकर उसके भाई पर हमला कर दिए। इंद्रदेव के साथ उसके परिवार के सदस्यों में भाई बलदेव, पिता राम नारायण, माता लालती को मनबढ़ों ने उस समय मारपीटकर घायल कर दिया, जब सभी भाई चंद्रदेव को बचाने गए। इस घटना में सभी को गंभीर चोटें आई। सीजेएम ने दोनों पक्षों के तर्कों को सुनने तथा पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्यों का अवलोकन करने के बाद आरोपीगण वीरेंद्र, सुरेश, ललिता और उर्मिला को बलवा, मारपीट, मारपीट कर गंभीर चोट पहुंचाने का दोषी पाया। दोषी पाए जाने के बाद सभी को तीन साल की सजा और 2750 रुपये अर्थदंड लगाया। वहीं, अर्थदंड जमा हो जाने पर वादी मुकदमा इंद्रदेव और घायल बलदेव को 2500-2500 रुपया बतौर क्षतिपूर्ति के रूप में देने का आदेश दिया। आरोपी बने पांचू, हरदेव और रजौती की मुकदमें के दौरान मौत हो गई। इस पर कोर्ट ने उनके विरुद्ध कार्यवाही समाप्त कर दी गई थी।