मऊ। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश कोर्ट नंबर दो आदिल आफताब अहमद ने 16 वर्ष पूर्व बसपा नेता और पीटी आई अध्यापक परशुराम मौर्या तथा विभूति हरिजन दोहरे हत्याकांड में नामजद आठ आरोपियों में एक को दोषी पाते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई। साथ ही 50 हजार रुपया जुर्माना भी लगाया। दौरान विचारण तीन आरोपियों की मौत हो चुकी थी , वही चार संदेह का लाभ लेते हुए बरी हुए हैं। मामला मधुबन थाना क्षेत्र का है।
वादी मुकदमा बाबूराम मौर्य की तहरीर पर रिपोर्ट दर्ज हुई। वादी का कथन है कि उसके भाई परशुराम मौर्य पीटीआई के पद पर विद्यालय में कार्यरत थे साथ ही बसपा नेता भी थे। विभूति हरिजन के साथ 16 जुलाई 2002 को मोटरसाइकिल से घर जा रहे थे। गंगऊपुर गांव के पास जीप से धक्का लग गया। उसके बाद चार लोग जीप से उतरे और उन्हें गोली मारदी। जिससे उनकी मौत हो गई। वादी का कथन है कि बांके यादव और रामाश्रय से उसकी पुरानी रंजिश चल रही थी। पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर बाद विवेचना सिदुलिया गांव निवासी बांके यादव पुत्र अलगू यादव, परसिया जयरामपुर गांव निवासी रामाश्रय पुत्र बब्बन यादव , मानपुर गांव निवासी अमरजीत यादव पुत्र रामप्रीत यादव तथा देवरिया जनपद के सलेमपुर थाना क्षेत्र के रामपुर बुजुर्ग गांव निवासी राधेश्याम पुत्र रमाशंकर और अजीत सिंह पुत्र राधेश्याम तथा बलिया जनपद के उभांव थाना क्षेत्र के चैनपुर गुलौरी गांव निवासी सियाराम पुत्र रमाशंकर तथा भानू प्रताप यादव और प्रेम चंद कुशवाहा के विरुद्ध आरोप पत्र कोर्ट में प्रेषित किया। अभियोजन की ओर से पैरवी करते हुए वरिष्ठ अभियोजन अधिकारी धर्मेंद्र पांडेय ने चार गवाह पेश किए। कोर्ट ने रामाश्रय को हत्या का दोषी पाते हुए आजीवन कारावास की सजा दी और राधेश्याम सिंह, अजीत सिंह ,अमरजीत यादव और सियाराम को संदेह का लाभ देते हुए दोष मुक्त कर दिया।