मऊ। सरकार के फरमान पर जिले के प्रत्येक ब्लाकों में चयनित अंग्रेजी माध्यम के प्राथमिक विद्यालयों में पढ़ाई भगवान भरोसे हो रही है। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी के निर्देश के 18 दिन बाद भी नामित शिक्षक विद्यालय नहीं पहुंच सके हैं। कई विद्यालयों में पूर्व तैनात प्रधानाध्यापकों ने चार्ज तक नहीं दिया है। यहां पूर्व तैनात स्टॉफ को दूसरे विद्यालय में भेजने की योजना है। इतना ही नहीं अभी तक इन स्कूलों में बच्चों को किताबें भी नहीं मिली हैं। ऐसे में न तो अंग्रेजी सिखाई जा रही और न ही हिंदी माध्यम का कोर्स शुरू हो पा रहा है। विभागीय अभिलेखों में सभी प्रक्रिया पूरी करना दिखाया गया है। जिले के परिषदीय विद्यालयों को निजी विद्यालयों के समकक्ष खड़ा करने के लिए शासन ने 1 अप्रैल माह से जिले के प्रत्येक ब्लाकों में पांच-पांच सहित 50 प्राथमिक विद्यालयों में अंग्रेजी माध्यम से पढ़ाई शुरू करने का आदेश जारी किया गया। इसके लिए परीक्षा के आधार पर शिक्षकों की तैनाती होनी थी। शिक्षकों ने ज्यादा रुचि नहीं दिखाई। 87 शिक्षक ही परीक्षा में शामिल हुए। नगर में शिक्षकों की कमी को देखते हुए अंग्रेजी माध्यम के लिए चयनित एक मात्र स्कूल को परदहां ब्लाक में स्थानांतरित कर दिया गया। शिक्षकों की कमी को देखते हुए बीएसए ने खंड शिक्षा अधिकारियों को योग्यता के अनुरुप शिक्षकों को नामित करने का फरमान जारी किया। कागज में तो सभी प्रक्रिया पूरी कर ली गई है, लेकिन अभी तक कई विद्यालयों में शिक्षकों ने इन स्कूलों में जाने को रुचि ही नहीं दिखाई है। वह अभी तक दायित्वों से मुंह मोड़े हुए है।
शिक्षा सत्र शुरू हुए 18 दिन बीत गया अभी तक अंग्रेजी माध्यम की किताबें नहीं आई हैं। कब तक विधिवत पढ़ाई शुरू हो जाएगी अधिकारी बताने को तैयार नहीं हो रहे हैं। बढुआगोदाम संवाददाता के अनुसार परिषदीय विद्यालयों की शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए परदहां ब्लाक क्षेत्र में छह प्राथमिक विद्यालयों में अंग्रेजी माध्यम से पढ़ाई शुरू तो कर दी गई है। लेकिन अभी तक नामित शिक्षक विद्यालय नहीं पहुंच सके हैं। बच्चे बिन किताब के ही पढ़ाई करने को विवश हैं। प्राथमिक विद्यालय बढुआगोदाम में अंग्रेजी माध्यम के लिए प्रधानाध्यापिका तो विद्यालय आ रही हैं, लेकिन पहले से तैनात प्रधानाध्यापिका ने अभी तक चार्ज ही नहीं सौंपा है। इसी तरह प्राथमिक विद्यालय कहिनौर में पांच के सापेक्ष एक शिक्षक पहुंचे ही नहीं हैं। इसी तरह प्राथमिक विद्यालय वजीरपट्टी में तीन, उस्मानपुर में एक शिक्षक विद्यालय पहुंचे ही नहीं हैं। जबकि खंड शिक्षा अधिकारी ने नामित कर दिया है। अभिभावकों का कहना है कि अंग्रेजी माध्यम से पढ़ाई होने के चलते बच्चों का नामांकन तो कराया, लेकिन दयनीय व्यवस्था होने के चलते कुछ समझ में नहीं आ रहा है। यही हाल अन्य ब्लाकों का है। इस बाबत जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी ओपी त्रिपाठी का कहना है कि निदेशालय से किताबें आते ही वितरित कर दी जाएगी। मानक के अनुरूप शिक्षकों की तैनाती की गई है। गड़बड़ी मिलने पर संबंधित के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।