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बर्बादी के कगार पर पहुंच गया है व्यापारी और किसान

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मऊ। उत्तर प्रदेश किसानसभा के तत्वावधान में सदस्यों और पदाधिकारियों ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर सोमवार को कलेक्ट्रेट पर प्रदर्शन किया। साथ ही मुख्यमंत्री को संबोधित जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपा। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि दशकों बीत जाने के बाद भी आलू किसान एक नए चक्रव्यूह में फंस गया है। फरवरी माह में आलू की फसल तैयार होने पर किसान और व्यापारी मिलकर कोल्ड स्टोरेज में रखते हैं। तीन वर्षो से किसान और व्यापारी गोदामों पर आलू निकासी के लिए नहीं जा रहे हैं। सितंबर, अक्तूबर, नवंबर में आलू की कीमत खुले बाजार में कोल्ड स्टोर के भाड़े से कम हो जाती है। किसान और व्यापारी बर्बादी के कगार पर पहुंच गया है। व्यापारी भी बाजार को लेकर उहापोह की स्थिति में हैं। जिले में आलू क्रय केंद्रों को तत्काल खोलवाया जाए। आलू के घोषित रेट 449 से बढ़ाकर 1200 रुपये कुंतल दिया जाए। नहरों की साफ सफाई के साथ टेल तक पानी पहुंचाया जाए। महिला, पुरुष किसानों, मजदूरों, दस्तकारों को 10 हजार रुपया पेंशन दिया जाए। कर्जमाफी योजना अंतर्गत वंचित किसानों का कर्ज माफ करते हुए ब्याज भी दिया जाए। डीजल, पेट्रोल मूल्य वृद्धि पर रोक लगाई जाए। प्रदर्शन करने वालों में अर्चना उपाध्याय, अनीस अहमद, हिसामुद्दीन, जितेेंद्र राजभर, रामकुमार भारती, रामप्यारे गौतम, महेंद्र यादव आदि शामिल रहे।
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