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अधिकांश परिषदीय विद्यालयों में है बुनियादी सुविधाओं का अभाव

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मऊ। आरटीई लागू होने के वर्षो बीत जाने के बाद भी जिले के अधिकांश परिषदीय तथा सरकारी विद्यालयों मेें बुनियादी सुविधाओं को बहाल नहीं किया जा सका है। सरकारी विद्यालयों की खस्ता हालत को लेकर हाईकोर्ट की टिप्पणी के बाद भी अधिकारी गंभीरता से नहीं ले रहे हैं। जिले के अधिकांश परिषदीय विद्यालयों में बुनियादी सुविधाओं का अभाव है। जिले के नाम मात्र परिषदीय विद्यालयों में ही डेस्क बेंच की व्यवस्था है। बिजली की सुविधा न होने से कम रोशनी में जमीन पर बैठकर पढ़ाई करने को विवश हैं।
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जिले में 1060 प्राथमिक तथा 442 उच्च प्राथमिक विद्यालय हैं। सरकार की तरफ से आरटीई लागू किया गया तो लोगों को सरकारी विद्यालयों में बेहतर सुविधा की आस जगी, लेकिन वर्षो बीत जाने के बाद भी क्रियान्वयन नहीं किया जा सका है। हालत यह है कि अधिकांश विद्यालयों में बिजली, पेयजल, शौचालय सहित विभिन्न बुनियादी सुविधाओं का अभाव है। शौचालय बने तो हैं, लेकिन उचित रख रखाव के अभाव में उपयोग करने लायब नहीं रह गए हैं। बच्चों को बैठने के लिए डेस्क बेंच तक बैठने की व्यवस्था तक नहीं है। विद्यालयों के कक्षों में पर्याप्त रोशनी की व्यवस्था तक नहीं की जा सकी है। इससे बच्चों को अंधेरे में ही पढ़ाई करनी पड़ रही है। अधिकांश परिषदीय विद्यालयों में बनाए गए शौचालय उपयोग करने लायक नहीं हैं। विद्यालयों में गंदगी का अंबार लगा है। आंकड़ों के मुताबिक लगभग 800 विद्यालयों में विद्युतीकरण नहीं कराया जा सका है। जिन स्कूलों में विद्युतीकरण कराया भी गया है उसमेें वायरिंग, स्वीच बोर्ड गायब हो गया है। चोरी के डर से विद्यालयों के प्रधानाध्यापक अपने घर पर कंप्यूटर व पंखा रखे हुए हैं। कंप्यूटर की सुविधा के बाद भी बच्चों को कंप्यूटर चलाना तो दूर देखने को भी नहीं मिल पा रहा है। सर्व शिक्षा अभियान के तहत विभिन्न योजनाओं में प्रतिवर्ष करोड़ों रुपया खर्च किया जा रहा है। इसके अलावा प्रत्येक विद्यालयों के भवन मरम्मत, रंगाई पुताई आदि के मद में 7500 रुपये विद्यालय प्रबंध समिति के खाते में भेजा भी जा रहा है। इसके बावजूद विद्यालयों की स्थिति में सुधार नहीं हो सका है। इस बाबत मंडलीय सहायक निदेशक वाईके सिंह का कहना है कि जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी से रिपोर्ट मांगी गई है। विद्यालयों में डेस्क बेंच सहित अन्य सुविधाओं के लिए बजट के लिए शासन से मांग की गई है।
परिषदीय विद्यालयों में संसाधनों का है अकाल
मझवारा। क्षेत्र के विभिन्न इलाकों के परिषदीय विद्यालयों में सुविधाओं का अकाल है। प्राथमिक विद्यालय पवनी मेें बिजली, पेयजल सहित सुविधाओं का टोंटा है। बच्चों को टाट पर बैठकर पढ़ाई करना पड़ रहा है।इसी तरह खैरा मुहम्मदपुर स्थित उच्च प्राथमिक विद्यालय में भी सुविधाओं का अभाव है। बच्चों को टाट पर ही पढ़ाई करना पड़ रहा है। विद्यालयों पर लगा हैंडपंप प्रदूषित पानी उगल रहा है।
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ढहने के कगार पर है विद्यालय का भवन
पिपरीडीह। क्षेत्र के रैकवारडीह स्थित प्राथमिक विद्यालय प्रथम का भवन जर्जर हाल में है। भवन की दीवारें फट जाने से शिक्षक तथा छात्र दहशत में जी रहे हैं। अभिभावकों को भी अपने लाडलों के सुरक्षा की चिंता सताने लगी है। विभागीय लापरवाही की स्थिति यह है कि विद्यालय परिसर में 10 कमरों का निर्माण कार्य लंबे समय से अधर में लटका पड़ा है। सब कुछ जानकर अधिकारी मौन साधे हुए हैं।
प्राथमिक विद्यालय रैकवारेडीह प्रथम का भवन जर्जर हाल में रहने के बाद भी विभाग की तरफ से वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की जा सकी है। विद्यालय में 188 छात्र छात्राओं का नामांकन किया गया है।
विद्यालय के भवन की स्थिति यह है कि दीवार जगह जगह फट गई है। भवन गिरने की आशंका से शिक्षक बच्चे दहशत में जी रहे हैं। बच्चे जब तक घर वापस नहीं आ जाते हैं अभिभावक चिंतित रहते हैं। शौचालय की सुविधा न होने से छात्रों तथा शिक्षिकाओं को असुविधा का सामना करना पड़ रहा है। विद्यालय परिसर में दो इंडिया मार्क हैंड पंप लगाए गए हैं। दोनों हैंडपंप प्रदूषित पानी उगल रहे हैं। प्रदूषित पानी के सेवन से बच्चे विभिन्न बीमारियों से ग्रसित हो रहे हैं। इस संबंध में प्राथमिक विद्यालय की प्रधानाध्यापिका कांलिदी दुबे ने बताया कि शौचालय तथा जर्जर भवन के मामले मेें विभागीय अधिकारियों को कई बार पत्र लिखा गया है। लेकिन भी तक समस्या का समाधान नही हो पाया है। प्राथमिक विद्यालय के लिए कई वर्षो से अर्धनिर्मित दस कमरे बने हैं। भवन का कार्य पूरा नहीं किया जा सका है। इस बाबत जिला समन्वयक निर्माण अजीत तिवारी का भवन निर्माण कार्य में अनियमितता बरती गई है। भवन प्रभारी से धन के रिकवरी की कार्यवाही चल रही है।
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