रानीपुर ब्लाक में संचालित शिरामणी संत रविदास स्वंय सहायता समूह द्वारा दीपावली पर तैयार किए गए द?
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मऊ। जिले में बीते जुलाई माह में स्थापित राष्ट्रीय आजीविका मिशन के प्रयास से छह माह में जिले में 972 समूहों का गठन किया गया। प्रति समूह में 12 महिलाओं को शामिल किया गया है। इस तरह से जिले के विभिन्न ब्लाकों की करीब 11 हजार 664 महिलाएं रोजगार पाकर आत्मनिर्भर बनी हैं। समूह के माध्यम से रोजगार परक बनी महिलाओं के उत्पाद को सरकार बाजार देने का काम कर रहा। इस तरह से कुछ समूह आज पूरी तरह से आत्मनिर्भर हो चुका है।
बीते दिनों समूहों ने जिले के प्राथमिक विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चों का ड्रेस सिलाई कर 31 लाख आठ हजार छह सौ रुपया की कमाई किया। परियोजना निदेशक आजीविका मिशन मत्स्यनाथ त्रिवेदी ने बताया कि यह रकम जो मिली है इसमें रॉ मैटेरियल के रूप में समूहों ने सिर्फ धागा खर्च किया। कपड़ा और अन्य सामान बेसिक शिक्षा ने उपलब्ध कराया था। इस धनराशि में से चार लाख रुपये का भुगतान समूह को हो चुका है। इसके अलावा समूहों को कोटे की दूकान संचालित करने और बिजली बिल की वसूूली करने का भी अनुबंध संबंधित विभागों से करा लिया गया है।
वर्तमान में समूहों के माध्यम से आंगनबाड़ी केंद्रों को ड्राई राशन का वितरण किया जा रहा है। पहले यह आपूर्ति बाहर से आती थी, लेकिन अब बदलाव आया है, इससे समूहों की भी आमदनी हो रही, साथ ही साथ संस्था को सही सामान मिल रहा है। बरवक्त शिरोमणि संत रविदास स्वंय सहाता समूह दीपावली पर तरह तरह के सामान बनाकर बेचने का काम शुरु किया है। इसमें से अधिकांश समानों को तो सरकारी कर्मचारियों और कार्यालयों में बेच दिया गया।
समूहों के माध्यम से जुड़ी महिलाओं को पहले प्रशिक्षण दिया जाता है, इसमें कोई जरूरी नहीं है कि महिलाएं वही काम करें, जो उन्हे बताया जाए, वो खुद की इच्छा वाले कामों को भी कर सकती है। इसमें कम से कम चार महिलाएं शामिल हो। इस तरह से जुलाई 20 से जिले में शुरु हुई राष्ट्रीय आजीविका मिशन में 11 हजार से अधिक महिलाएं जुड़कर रोजगार पा चुकी है। आगे महिलाओं को और कुछ बड़ा कराने की योजना है। - मत्स्यनाथ त्रिवेदी, उपयुक्त स्वत: रोजगार, एनआरएलएम मऊ।