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मतदाता पर्ची के लिए भटकते रहे

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मऊ। चुनाव आयोग के निर्देशानुसार मतदान से पहले हजारों मतदाताओं के घरों पर पर्चियां नहीं पहुंच सकीं हैं। नई मतदाता सूची में भाग संख्या में परिवर्तन कर दिया गया है। इसके साथ ही मतदाता सूची में मुहल्ला और बस्तीवार नाम नहीं शामिल किया गया है। इसलिए भी बीएलओ को मतदाताओं के घरों तक पहुंचने में परेशानी हो रही है।
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आयोग की गाइड लाइन के अनुसार मतदाताओं के घरों तक उनकी पर्चियां मतदान से कम से कम एक दिन पहले पहुंच जानी चाहिए। इसके लिए परिषदीय स्कूलों के अध्यापकों, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सफाईकर्मियों को बीएलओ बनाया गया है। नई मतदाता सूची में भाग संख्या बदल गई है। इससे मतदाताओं और बीएलओ को नाम खोजने में परेशानी हो रही है। शनिवार की शाम चार बजे तक आधे मतदाताओं के घरों पर पर्चियां नहीं पहुंच पाई तो लोग परेशान हो उठे। मतदाताओं ने बीएलओ को फोन करना शुरु किया तो पता चला कि वे भी मतदाताओं के घर खोजने में परेशान हैं। बीएलओ राधा सिंह, राम ध्यान और कंचन का कहना था कि एक बस्ती के सभी परिवारों के सदस्यों के नाम एक स्थान पर नहीं है बल्कि आस पास के परिवारों के नाम दूर बस्ती वालों के साथ अंकित हो गए हैं। इसके साथ ही ऐसा भी है कि एक ही स्थान पर पांच पांच बीएलओ को आवंटित मतदाता परिवारों के घर हैं। यानी एक ही स्थान पर पांच पांच बीएलओ को पर्चियां लेकर जाना पड़ रहा है। दुबारी संवाददाता के अनुसार मधुबन विधान सभा क्षेत्र के नेवादा गोपालपुर ग्राम पंचायत के प्रधान प्रतिनिधि अमित तिवारी का आरोप है कि ग्राम में तैनात लेखपाल की ड्यूटी शनिवार को बूथ बनाने के लिए लगी है लेकिन सुबह से गांव में आया ही नहीं और इस संबंध में उपजिलाधिकारी निरंकार सिंह मधुबन का कहना है कि बूथ पर लेखपाल की सिर्फ इतना ड्यूटी है कि वह बूथ को बना कर तैयार कर दे।

सफाई कर्मियों को भी बना दिया गया बीएलओ
मतदाता सूची में मतदाताओं के नाम खोजने के लिए अंग्रेजी वर्णमाला से उनके नाम अंकित हैं। कई स्थानों पर सफाई कर्मियों को बीएलओ बना दिया गया है। इन बीएलओ को अंग्रेजी नहीं आ रही है जिससे उन्हें नाम खोजने में परेशानी हो रही है।
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