मधुबन। फतहपुर मंडाव ब्लाक मुख्यालय स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बदहाल पड़ा है। यहां सुविधाओं का अकाल है। विशेषज्ञ चिकित्सकों का पद रिक्त लंबे समय से चल रहा है। यही नहीं अस्पताल में अल्ट्रसाउंड तथा एक्सरे की सुविधा न होने से गंभीर मरीजों का इलाज जैसे तैसे हो रहा है।
फतहपुर ब्लाक की आबादी लगभग तीन लाख है। शासन की तरफ मधुबन तहसील में चार प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र तथा एक सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की स्थापना की गई है। ब्लॉक मुख्यालय से तीन किलोमीटर दूर फतहपुर स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र को नौ वर्ष पूर्व उच्चीकृत कर सीएचसी का दर्जा दिया गया तो मधुबन तहसील क्षेत्र के लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा की आस जगी, लेकिन अब लोगों के सपनो पर ग्रहण लग गया है। यहां 200 मरीजों की प्रतिदिन की ओपीडी है, फिर भी जरूरी दवाओं का अकाल रहता है। अस्पताल में एक्सरे तकनीशियन की तैनाती तो की गई है, लेकिन एक्सरे की सुविधा ही नहीं है। तकनीशियन को रतनपुरा में संबद्ध किया गया है। विभागीय उदासीनता के चलते अल्ट्रासाउंड, एक्सरे, ईसीजी की सुविधा न होने से गंभीर मरीजों का इलाज जैसे तैसे होता है। सृजित पद के अनुसार यहां पर नौ के सापेक्ष चार चिकित्सकों की तैनाती है। विशेषज्ञ चिकित्सकों का पद लंबे समय से पद रिक्त चल रहा है। अस्पताल मेें जगह-जगह गंदगी का अंबार लगा है। इलाज कराने वाले मरीजों को बीमारी होने का खतरा बना रहता है। अस्पताल मेें सफाई कार्य का जिम्मा मात्र एक सफाईकर्मी के भरोसे है। अस्पताल में इलाज कराने आए मधुबन कस्बे के अखिलेश सिंह राठौर, रंजीता यादव, पीयूष मौर्य, अंकुर मल्ल का कहना है कि अस्पताल में सुविधाओं का अकाल है। गंभीर मरीजों को चिकित्सकों द्वारा रेफर कर इतिश्री कर दी जाती है। सुविधाओं को बहाल नहीं किया गया तो हम लोग चुप नहीं बैठेंगे। इस बाबत सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के अधीक्षक डॉ. राजीव कुमार पांडेय का कहना है कि विशेषज्ञ चिकित्सकों का पद रिक्त चल रहा है। सीमित संसाधनों से बेहतर कार्य करने का प्रयास जारी है। मुख्य चिकित्साधिकारी को पत्र भेजा गया है।