जिला अस्पताल में प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के तहत गोल्डन कार्ड पाना गरीबों के लिए टेढ़ी खीर हो गया है। तीन माह से ज्यादा समय बीतने के बाद भी दर्ज 1 लाख परिवारों में से केवल 4500 परिवारों को गोल्डन कार्ड मिल सका है। जबकि इस बीच सिर्फ 60 मरीजों को ही योजना के तहत इलाज मिल सका है। इनमें से 90 फीसदी से ज्यादा मरीजों का इलाज जिला अस्पताल में हुआ है।
बताते चले कि 2011 सर्वेक्षण के तहत जिले के सदर तहसील, मुहम्मदाबाद गोहना, घोसी और मधुबन तहसील के 9 ब्लाकों से 1 लाख 11 हजार परिवार को आयुष्मान योजना के तहत चिह्नित किया गया था। गोल्डन कार्ड बनाए जाने के लिए 90 हजार से ज्यादा लाभार्थियों को योजना का पत्र भेजा जा चुका है। इसमें करीब 50 हजार से ज्यादा लाभार्थियों को पत्र भी वितरित हो चुका है। बावजूद 25 सितंबर 2018 से शुरू योजना के सवा तीन माह बीतने के बाद भी करीब 4500 परिवारों का ही गोल्डन कार्ड मिल सका है। उधर योजना में शामिल चार सरकारी और तीन निजी अस्पतालों में केवल 60 मरीजों का इलाज हुआ है। इसमें 53 मरीजों का अकेले इलाज जिला अस्पताल, दो महिला जिला अस्पताल तो शेष निजी अस्पतालों में हुआ है।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. सतीशचंद्र सिंह ने बताया कि जिले में योजना में शामिल परिवारों का इलाज किया जा रहा है। इसके तहत गोल्डनकार्ड बनाया जा रहा है। कहा कि बिना गोल्डन कार्ड के भी योजना मरीजों को प्रधानमंत्री पत्र और दूूसरे दस्तावेजों पर इलाज किया जा रहा है।