नगर सहित जिले के विभिन्न इलाकों में तेजी से बढ़ रही छुट्टा पशुओं की संख्या से आम लोगों की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। पशुओं का झुंड खेेतों में घुसकर फसलों को बर्बाद कर रहा है। साथ ही शहर के लोगों के लिए भी समस्या बन गए हैं। जिला प्रशासन की तरफ से अभी तक मात्र एक ब्लाक में गो संरक्षण केंद्र का शिलान्यास किया जा सका है। नगरपालिका तथा नगर पंचायतों की तरफ से समस्या से निजात दिलाने के लिए कार्ययोजना तक नहीं बनाई जा सकी है।
गोवध पर रोक लगाने के शासनादेश के बाद छुट्टा पशुओं की संख्या में तेजी से इजाफा हुआ है। छुट्टा पशु नगर के बाजारों, गांवों में लोगों के लिए समस्या बन चुके हैं। झुंड में छुट्टा पशु गेहूूं, जौ, मटर, गन्ना, सब्जी की फसलों में घुसकर नष्ट कर दे रहे हैं। पशुपालन और कृषि विभाग की तरफ से कोई कार्ययोजना नहीं बनाई जा सकी है। शासन की तरफ से प्रत्येक गांव में चारागाह की जमीन चिह्नित कराकर चारागाह विकसित करना है, लेकिन अभी तक कागज में ही प्रक्रिया चल रही है। रतनपुरा ब्लाक क्षेत्र के कुड़वा गांव मेें प्रभारी मंत्री द्वारा सिर्फ 283 लाख की लागत से गो संरक्षण केंद्र का शिलान्यास किया जा सका है। नगर पालिका व नगर पंचायत प्रशासन वर्षों से छुट्टा पशुओं को पकड़वाने की योजना बना रहा है पर अभी तक योजना फलीभूत नहीं हो सकी है। पशुुओं को सड़कों से पकड़ने का काम तभी होता है जब कोई वीवीआईपी या वीआईपी का नगर में आगमन होता है। नगर के बाजारों सहित गलियों में इनका आतंक बढ़ता जा रहा है। कभी-कभी तो पशु आक्रामक होकर हमला कर बैठते हैं। इस बाबत मुख्य पशु चिकित्साधिकारी भगवान सिंह का कहना है कि रतनपुरा ब्लाक क्षेत्र के कुड़वा में गो संरक्षण केंद्र का प्रभारी मंत्री ने शिलान्यास किया है। बजट मिलते ही अन्य ब्लाकों में भी गो संरक्षण केंद्र खोला जाएगा।