मऊ। नोटबंदी के बाद डिजिटल लेनदेन भुगतान करने के प्रति खाताधारकों का रुझान तेजी से बढ़ा है। बैंकों में एक वर्ष में 300 से 400 करोड़ डिजिटल भुगतान किया गया है। काफी संख्या में लोग एटीएम का प्रयोग कर रहे हैं। लेकिन तकनीकी समस्याओं का त्वरित निस्तारण न होने से लगभग 15 प्रतिशत खाताधारक डिजिटल लेनदेन के प्रति हिचक रहे हैं।
नोटबंदी का एक साल आठ नवंबर को पूरा हो रहा है। नोटबंदी के बाद सरकारी की तरफ से डिजिटल भुगतान पर जोर दिया गया था। एक साल पहले ज्यादातर आबादी डिजिटल के बारे में अनभिज्ञ थी। नगदी पर ही लोगों का ज्यादा जोर था। लेकिन अब सरकार का प्रयास रंग लाने लगा है। छात्रों, सरकारी कर्मचारियों, व्यापारियों, उद्यमियों, कारोबारियों आदि का रुझान डिजिटल लेनदेन की ओर तेजी से बढ़ा है। लीड बैंक के प्रबंधक गिरिशचंद्रा ने इसकी पुष्टि की। बोले नोटबंदी से पहले भी नेटबैंकिंग की सुविधा थी, लेकिन लोग इस सुविधा के प्रति इतने जागरूक नहीं थे। मिले आंकड़ों के अनुसार नोटबंदी से पहले डिजिटल लेनदेन का आंकड़ा 100 करोड़ के आसपास था। अब यह आंकड़ा 300 से 400 करोड़ तक पहुंच चुका है। इसमें इजाफा ही हो रहा है। यही नहीं लगभग 90 प्रतिशत खाताधारक एटीएम का प्रयोग कर रहे हैं। कारोबारी नेटबैकिंग का प्रयोग ज्यादा करने लगे हैं। एटीएम से पैसा निकलने के के दौरान गड़बड़ी होने से लगभग 15 प्रतिशत खाताधारक डिजिटल लेनदेन में रुचि नहीं दिखा रहे हैं।
व्यापारियों के अनुसार डिजिटल लेनदेन की लोकप्रियता तेजी से बढ़ रही है। ऑनलाइन पेमेंट होने से बैंक जाने से निजात मिली है। घर बैठे ही लेनदेन संभव हो जा रहा है।इस संबंध में उप्र उद्योग व्यापारमंडल के प्रतिनिधिमंडल के महामंत्री गोपाल कृष्ण बरनवाल का कहना है कि डिजिटल लेनदेन से काफी सहूलियत मिल रही है। बिना बैंक गए ही दुनिया के किसी देश में लेनदेन किया जा सकता है। न तो चोरी का डर रहता है और न ही असली नकली नोट का खतरा रहता है। डिजिटल लेनदेन के तरीकों के बारे में आधी अधूरी जानकारी होने पर ही समस्या आती है। सरकार की तरफ से खाताधारकों को डिजिटल लेनदेन करने के प्रति प्रशिक्षित कर दे तो शत प्रतिशत खाताधारक रुचि ले सकते हैं। इस बाबत एलडीएम गिरीश चंद्रा का कहना है कि नोटबंदी के बाद डिजिटल लेनदेन 400 करोड़ तक पहुंच गया है। खाताधारकों को जागरुक करने का प्रयास जारी है।