जिला पंचायत अध्यक्ष चुनाव के दौरान भितरघात के कयासों को दोपहर बाद आए नतीजे ने पूरी तरह से नकार दिया। सिर्फ दो सदस्यों ने ही दलीय निष्ठा के विपरीत वोट दिया। हालांकि, उन दोनों ने यह फैसला खुलेआम लिया था।
जिला पंचायत अध्यक्ष पद को लेकर करीब एक पखवाडे़ से चल रही सरगर्मी आखिरकार मतदान और उसके बाद आए परिणाम से थम गई। परिणाम से पहले सभी उम्मीदवार अपनी-अपनी जीत के दावे कर रहे थे। इसमें सभी का आंकड़ा 22 के आसपास ही था। ऐसे में भितरघात की संभावनाएं थीं।
लेकिन, गुरुवार को अपराह्न सवा तीन बजे आए नतीजे ने स्थिति पूरी तरह से साफ कर दी। भाजपा को रालोद गठबंधन के सहारे 21 सदस्यों का समर्थन मिला है। इसमें तीन निर्दलीय शामिल हैं। भाजपा और रालोद गठबंधन से निर्वाचित सदस्यों की संख्या 18 थी।
बसपा को 14 मत मिले हैं, जिसमें दो निर्दलीय हैं। समाजवादी पार्टी को तीन मत मिले हैं। समाजवादी पार्टी समर्थित उम्मीदवारों की संख्या भी तीन ही थी। ऐसे में सपा से न तो कोई सदस्य जुड़ा और न ही कोई दूसरे खेमे में गया है।
भाजपा और बसपा में एक-एक सदस्य की अदला-बदली हुई। भाजपा समर्थित एक सदस्य ने बसपा के काफिले के साथ पहुंचकर इसका इजहार खुलेआम भी कर दिया। इसी तरह बसपा से निर्वाचित एक सदस्य ने भाजपा खेमे के साथ मतदान करते हुए अपने फैसले की जानकारी दी।