ब्रजभूमि में हाथी की चाल सुस्त पड़ती जा रही है। पिछली बार रालोद से पराजित हुई बसपा इस बार जिला पंचायत अध्यक्ष पद पर भाजपा से हार गई।
जिला पंचायत अध्यक्ष पद के नतीजों ने बसपा को हिलाकर रख दिया है। आगामी विधानसभा चुनावों की तैयारी में जुटी बसपा के लिए यह नतीजे चौंकाने वाले भी हैं। जिला पंचायत सदस्य पद के चुनाव में सबसे बड़ी पार्टी बनने के बाद बसपा को करारी मात का सामना करना पड़ा है।
बसपा की इस हार की बड़ी वजह एक बार फिर रालोद बना है। भाजपा से रालोद के गठबंधन के चलते ही बसपा को जिला पंचायत में हार का सामना करना पड़ा है।
जिला पंचायत के पिछले चुनाव में भी बसपा को रालोद ने ही करारी मात दी थी। उस वक्त बसपा से जिला पंचायत अध्यक्ष पद की उम्मीदवार इस बार जीत का सेहरा बांधने वाली ममता चौधरी ही थीं। पूर्व मंत्री लक्ष्मीनारायण की पत्नी
ममता चौधरी ने बसपा से चुनाव लड़ा था, लेकिन तत्कालीन सांसद जयंत चौधरी की रणनीति के समक्ष बसपा हार गई थी। लेकिन इस बार बसपा छोड़कर भाजपा में आए पूर्व मंत्री लक्ष्मीनारायण ने अपनी पत्नी ममता चौधरी को तो जिता लिया, लेकिन बसपा एक बार फिर हार गई। इस हार के पीछे बसपा की आपसी गुटबाजी को भी माना जा रहा है।