गुरुवार को सेवायतों के बीच अधिकारों को लेकर हुए विवाद में दशकों पुरानी यमुना महारानी की आरती की परंपरा टूट गई। यमुना महारानी मंदिर पर पांच घंटे तक ताला लटका रहा। हर रोज दर्शन को आने वाले भक्त निराश होकर लौट गए। वहीं विवाद के निपटारे को चतुर्वेदी परिषद की दिन भर मीटिंग चलती रही। 13 घंटे बाद विवाद सुलझ सका।
यमुना के प्राचीन विश्राम घाट पर यमुना महारानी का मंदिर है। रोजाना सुबह साढ़े चार बजे मंदिर के द्वार खुल जाते हैं। पांच बजे हजारों भक्तों के साथ यमुना महारानी का अभिषेक और फिर आरती होती है। गुरुवार को सेवायतों में आपसी विवाद के चलते ये मंदिर नहीं खुला। दोनों ही सेवायतों ने अपने-अपने ताले मंदिर पर डाल दिए थे।
इसके चलते पांच घंटे मंदिर बंद रहा। हर रोज यमुना महारानी के दर्शन को आने वाले भक्त निराश होकर यहां से लौट गए। जब सेवायतों के बीच खींचतान की जानकारी माथुर चतुर्वेद परिषद को हुई तो वह मौके पर पहुंचे और विवाद के निपटारे को परिषद की मीटिंग बुलाई गई। दिन भर मीटिंग चलती रही।
परिषद की करीब 13 घंटे की मशक्कत के बाद विवाद सुलझ गया। मामले में तय किया गया कि जो समझौता हुआ है उसके अनुसार ही सेवा होगी। आदेश के बाद सेवायत ने दूसरे सेवायत को जिम्मेदारी दे दी।
यमुना महारानी का मंदिर प्राचीन है। सूचना के साथ ही वहां पदाधिकारी पहुंचे और सेवा नियमित कराने की व्यवस्था की। बैठक में तय किया गया है सेवा समझौते के अनुरूप ही होगी।
- राकेश तिवारी
महामंत्री, माथुर चतुर्वेद परिषद मथुरा
सुबह से चला बैठक का दौर
मामले में गुरुवार सुबह ही माथुर चतुर्वेद परिषद के पदाधिकारी मंदिर पहुंच गए थे। सेवा में व्यवधान न पड़े इसके लिए अस्थायी रूप से बाले चौबे को सेवा की जिम्मेदारी दे दी गई। दोपहर बार परिषद की बैठक अध्यक्ष दिनेश पाठक की अध्यक्षता में हुई। इसमें मंदिर के सभी सेवायत परिवारों को बुलाया गया। सेवायत राधेश्याम और प्रयागनाथ का पक्ष सुना गया। इसके बाद निर्णय लिया गया कि समझौते में जो तय हुआ था जिसमें 26 दिन राधेश्याम और चार दिन प्रयागनाथ को सेवा दी जानी है। इसी के अनुरूप सेवा होगी। बैठक का संचालन राकेश तिवारी ने किया। नवीन नागर मौजूद रहे।
इधर सेवायत राधेश्याम का कहना है कि हम इस समझौते से सहमत नहीं है। बुधवार शाम को प्रयागनाथ के परिवारीजनों ने जबरन मंदिर पर ताले डाल दिए थे। इसके चलते मंदिर की नियमित सेवाएं बाधित हुईं। सेवायत प्रयागनाथ ने बताया कि हमारा समझौता है 26 दिन वो लोग सेवा करेंगे और चार दिन हमें सेवा करनी है। बुधवार शाम को सेवा नहीं दी गई। इसके चलते व्यवधान पड़ा है।
यह था विवाद
मंदिर की सेवा के लिये एक समझौता हुआ था। इसमें 26 दिन की सेवा राधेश्याम को और चार दिन प्रयागनाथ को दी जानी थी। इस समझौते पर हाल ही में सहमति भी बनी। बुधवार शाम को ये चार्ज राधेश्याम को देना था लेकिन नहीं दिया। इसी पर विवाद बढ़ गया। दोनों सेवायतों ने मंदिर में अपने अपने ताले डाल दिए।