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लीलाओं के अभिनंदन को ‘100 करोड़ का चढ़ावा’

Sat, 17 Jan 2015 12:18 AM IST
ब्यूरो, अमर उजाला मथुरा
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भगवान कृष्ण की जन्म और लीला स्थली पर मेहरबान विश्वबैंक इसके आसपास के क्षेत्रों को भी पर्यटन की दृष्टि से विकसित करेगा है। प्रो-पूअर डेवलपमेंट प्रोजेक्ट के तहत इन धार्मिक स्थलों को बुनियादी सुविधाएं प्रदान की जाएंगी। मथुरा वृंदावन से जुड़े आधा दर्जन क्षेत्रों नंदगांव, बरसाना, गोकुल, बलदेव और गोवर्धन में 100 करोड़ रुपये खर्च कर इन्हें विकसित करने की तैयारी है।
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भगवान श्रीकृष्ण की जन्म और लीला स्थली के विकास के लिए विश्व बैंक 441 करोड़ रुपये खर्च करने जा रही है। प्रो-पूअर डेवलपमेंट प्रोजेक्ट के तहत इसकी योजना भी बना ली गई है। विश्व बैंक ने इसमें से करीब एक चौथाई धनराशि मथुरा-वृंदावन के अलावा ब्रज के अन्य धार्मिक स्थलों के विकास के लिए निर्धारित की है। इसमें गोवर्धन, बरसाना, नंदगांव, गोकुल और बलदेव शामिल है। इस राशि से इन धार्मिक स्थलों पर बुनियादी सुविधाओं के रूप में सफाई व्यवस्था, वाटर मैनेजमेंट, लाइटिंग और टूरिस्ट एरिया विकसित किए जाएंगे। विश्व बैंक की मंशा यहां भी पर्यटकों को आकर्षित करना है, जिसका लाभ यहां छोटे-छोटे रोजगार से जुडे़ लोगों को मिल सके।

गोवर्धन
देश भर से प्र्रतिवर्ष लगभग एक करोड़ से ज्यादा श्रद्धालु गोवर्धन पर्वत की परिक्रमा के लिए यहां आते हैं। इसमें विदेशी भक्तों की संख्या भी शामिल है। यहां गोवर्धन परिक्रमा के अलावा राधाकुंड, मानसी गंगा, श्याम कुंड और कुसुम सरोवर पर बनी वास्तुकला पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र रहती है।
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नंदगांव
यह भगवान श्रीकृष्ण की लीला स्थली से जुड़ा महत्वपूर्ण स्थल है। यह भगवान की बाल लीला स्थली के रूप में जाना जाता है। यहां नंदबाबा का प्राचीन भवन श्रद्धालुओं के लिए श्रद्धा का केंद्र रहता है।

बरसाना
लाडली राधा रानी की स्थली बरसाना ब्रज का प्राचीन धार्मिक स्थल है। यहां वन, उपवन और पर्वतों की श्रृंखला के साथ राधारानी की बाल क्रीड़ा के प्रमुख स्थल इसके आसपास है। यहां की लठामार होली विश्व विख्यात है।

बलदेव
यह भगवान श्रीकृष्ण के भ्राता दाऊबाबा की स्थली है। यहां बलदाऊ का विशाल मंदिर स्थित है, जिनके दर्शन के लिए लाखों भक्त प्रतिवर्ष पहुंचते हैं।

गोकुल
कान्हा के साथ यह स्थली दाऊबाबा और राधारानी के बचपन की लीलाओं की साक्षी है। यहां अनेक प्राचीन मंदिर और स्थल मौजूद हैं। यमुना किनारे स्थित गोकुल के घाट भी प्राचीनता को समेटे हुए हैं।
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