मथुरा। पूर्व में जहां उम्र अधिक होने के कारण बुजुर्गों को अल्जाइमर होती थी, लेकिन वर्तमान में यह बीमारी युवाओं में तेजी से बढ़ रही है। इसे अर्ली ऑनसेट अल्जाइमर कहा जाता है। युवाओं में तेजी से बढ़ रही इस बीमारी के पीछे चिकित्सक मोबाइल का अधिक प्रयोग, किताब न पढ़ना और बिगड़ी हुई दिनचर्या को मानते हैं।
चिंता का विषय बनी बीमारी से पीड़ित मरीजों का चिकित्सक उपचार तो कर रहे हैं, साथ ही उन्हें मोबाइल सहित अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों से दूरी बनाने की सलाह भी दे रहे हैं।
मनोचिकित्सक डॉ. रंजीत चौधरी ने बताया कि अल्जाइमर रोग एक प्रगतिशील मस्तिष्क रोग है। जो याददाश्त, सोचने की क्षमता और व्यवहार को प्रभावित करता है। इसे पूरे तरह से रोका नहीं जा सकता है, लेकिन दिनचर्या के बदलाव से इसे कम किया जा सकता है।
मोबाइल समेत अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का प्रयोग अर्ली ऑनसेट अल्जाइमर को बढ़ा रहा है। साथ ही शारीरिक गतिविधि की कमी भी इस समस्या को बढ़ाती है। इस तरह के मरीजों को किताब पढ़ने, शारीरिक व्यायाम, मानसिक विश्राम और योग करना चाहिए।
केडी मेडिकल कॉलेज में मनोचिकित्सक डॉ. गौरव सिंह ने बताया कि उनके यहां अल्जाइमर के 4-5 मरीज आते हैं। इसमें सबसे अधिक बुजुर्गों की संख्या होती है। यह बीमारी अनुवांशिक होती है। अल्जाइमर रोग डिमेंशिया का सबसे सामान्य रूप है। इसकी चपेट में युवा आ रहे हैं। इस तरह के 40 से 50 मरीज रोजाना उपचार के लिए आते हैं।
बीमारी से बचना है तो दिनचर्या में शामिल करें यह आदतें
मानसिक व्यायाम: नियमित रूप से किताबें पढ़ना, पहेलियां हल करना और अन्य मानसिक गतिविधियां मस्तिष्क को सक्रिय रखती हैं।
शारीरिक व्यायाम: नियमित शारीरिक गतिविधियां जैसे चलना, योग और खेल मस्तिष्क के स्वास्थ्य के लिए लाभकारी हैं।
सामाजिक जुड़ाव: परिवार और मित्रों के साथ समय बिताना मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाता है।
संतुलित आहार: पोषक तत्वों से भरपूर आहार मस्तिष्क के स्वास्थ्य के लिए आवश्यक है।
नींद: पर्याप्त और गुणवत्तापूर्ण नींद मस्तिष्क की कार्यप्रणाली को बेहतर बनाती है।