ब्लाक स्तर पर आयोजित किए गए ग्राम प्रधान और सदस्यों के शपथ ग्रहण समारोह में महिलाओं की मौजूदगी औपचारिकता मात्र नजर आई। कुछेक महिला प्रधानों को छोड़ दें तो अधिकांश घूंघट में लिपटी नजर आईं। खास तौर पर उम्रदराज महिलाओं का घूंघट कुछ ज्यादा ही नजर आया।
जिले में इस बार 547 ग्राम पंचायतों में से 186 को महिलाओं के लिए आरक्षित किया गया है। इसमें 43 महिलाएं अनुसूचित जाति और 51 महिलाएं अन्य पिछड़े वर्ग से हैं। जबकि 92 ग्राम पंचायतें अनारक्षित महिलाओं के लिए हैं।
इसमें शैक्षिक स्थित पर नजर डालें तो जिले में नवनिर्वाचित ग्राम प्रधानों में 70 प्रतिशत से ज्यादा अशिक्षित हैं या फिर उनकी शैक्षिक योग्यता पांचवीं पास दर्ज की गई है। जिले में तीन दर्जन से भी कम प्रधानों की शैक्षिक योग्यता स्नातक है। ऐसी महिला प्रधानों की संख्या अंगुलियों पर गिनने लायक है जो स्नातक हैं।
इस बार फरह ब्लाक में 15 ग्राम पंचायतों में महिलाओं की सत्ता काबिज हुई है, लेकिन इनमें ज्यादातर महिलाएं अंगूठा टेक हैं। वे ब्लाक सभागार में रविवार को शपथ लेने पहुंची। घूंघट की ओट में सभी महिलाओं ने शपथ ली। ज्यादातर महिला प्रधानों को शपथ बोलने में मुश्किल हो रही थी।
उमर की नाय पतौ लल्लू, कागज में देख लै
नंदगांव। ब्लाक की 38 ग्राम पंचायतों में निर्वाचित प्रधानों में छह प्रधान अशिक्षित हैं। 14 प्रधानों की शिक्षा प्राइमरी तक ही हुई है।
शपथ ग्रहण समारोह के दौरान एक महिला प्रधान से जब उनकी उम्र के बारे में पूछा गया तो वह सकुचाते हुए बोलीं, ‘उमर की नाय पतौ लल्लू, कागज में देख लै।’ वहीं घूंघट में खड़ी एक अन्य महिला प्रधान से पूछा गया कि प्रधानी कौन करेगा तो वह तपाक से बोलीं, ‘हम दोनू मर्द-बईयर परधानी करिंगे। अपने गांम कौ विकास करिंगे।’
नौहझील ब्लाक में ग्राम पंचायत नौहझील की प्रधान बीना अग्रवाल स्नातक हैं। वह विकास में पति की मदद तो स्वीकारती हैं, लेकिन समाज में पर्दा की बंदिश से खुद को मुक्त बताती हैं। वह कहती हैं, कि अफसरों के साथ खुद योजनाएं बनाएंगी और विकास कराएंगी।
गोवर्धन ब्लाक के गांव पाडल की पोस्ट ग्रेजुएट प्रधान पूनम का कहना है कि समाज की स्थिति को देखते हुए सब कुछ आवश्यक है। शिक्षा का उपयोग विकास के लिए किया जाएगा। पर्दा जहां आवश्यक है वहां किया जाएगा।
गोवर्धन ब्लाक के गांव आन्यौर की प्रधान गुड्डी देवी प्राइमरी शिक्षा प्राप्त हैं। वह कहती हैं कि जो जिसका दायित्व है वह पूरा किया जाएगा। परिवार के लोगों का कर्तव्य है वह पूरा करेंगे, जो हमारा है हम उसे पूरा करेंगे।
संकेत की प्रधान महावती शिक्षित नहीं है वह कहती हैं कि वे अपने पति के साथ मिलकर गांव को एक मॉडल गांव के रूप में दिखाने का पूरा प्रयास करेंगी।
श्रीवती कहती हैं कि शिक्षा का पर्दा से कोई लेना-देना नहीं है। यह समाज की मर्यादाएं हैं, जिन्हें निभाना है। विकास में पर्दा बाधा नहीं बनेगा।
कांमर की प्रधान चंदा की शिक्षा प्राथमिक है। वह समाज की स्थितियों की चर्चा करते हुए सब कुछ आवश्यक बताती हैं। वह कहती हैं कि काम भी कराएंगे और परिवार के सदस्यों का भी सहयोग लेंगे।
मांट ब्लाक के गांव जैसबां से निर्वाचित हुईं सरिता देवी का कहना है कि वे घूंघट में न रहकर विकास के लिए खुल कर सामने आएंगी। जनता के काम खुद कराने का प्रयास किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि वह प्रधानी स्वयं करेंगी। ग्राम पंचायत खांवल से प्रधान कमलेश रावत ने भी घूंघट से बाहर आकर गांव के लिए काफी कुछ करने का संकल्प लिया और कहा कि विकास के लिए पर्दे का मतलब ही नहीं उठता।
फरह ब्लाक के गांव पिपरौठ की प्रधान शकुंतला देवी का कहना है कि उनका पूरा काम पति ही संभालेंगे। गांव में क्या काम और विकास होगा, यह पति ही तय करेंगे। मैं तो उनके अधीन ही रहूंगी।
सलेमपुर की प्रधान कमलेश का कहना है कि उनके पति जो कहेंगे, वह वही करेंगी। वैसे सारे काम गांव वालों की सहमति से होंगे।
सात सदस्यों ने किया बहिष्कार
छाता। ग्राम पंचायत चंदौरी के सात ग्राम पंचायत सदस्यों ने शपथ ग्रहण समारोह का बहिष्कार किया। सदस्य निरोती, गिरधारी, रामफूल, अनीता, खजान, बनबारी और सुरेश का आरोप है कि प्रधान पद की मतगणना के दौरान मतगणना कर्मियों ने गड़बड़ी कर छह वोटों से इंदर सिंह को हरा दिया।
उन्होंने पुन: मतगणना के लिए कहा तो नहीं की गई। कोर्ट में पुन: मतगणना करने का पिटीशन दायर किया है।
नहीं थीं पर्याप्त कुर्सियां
नंदगांव। शपथ ग्रहण समारोह के दौरान प्रधानों और सदस्यों के बैठने के लिए पर्याप्त संख्या में कुर्सियां नहीं थीं। नवनिर्वाचित जनप्रतिनिधियों को खड़े होकर ही कार्यक्रम में शामिल होना पड़ा।