सुप्रीम कोर्ट के कडे़ रुख और लगातार मानीटरिंग के बाद भी वृंदावन में रह रहीं विधवा महिलाओं की स्थिति में सुधार नहीं हुआ है। प्रदेश सरकार के अधिकारी भी लगातार दौरे करते हैं लेकिन ये बेसहारा महिलाएं जर्जर आश्रय सदनों में रहने को मजूबर हैं। इन महिलाओं को सुविधा दिलाने का दावा करने वाले तो बहुत दिखाई देते हैं लेकिन हकीकत में इन्हें सहारा देने वाला कोई नहीं।
ज्ञानगुदड़ी के भूतगली पुराना पागल बाबा स्थित मीरा सहभागिनी आश्रय सदन के लीलाकुंज और रासविहारी सदन की स्थिति तो बेहद खराब है। इन दोनों सदनों में 180 विधवा और बेसहारा महिलाएं निवास कर रहीं हैं। लेकिन, इनकी बिल्डिंग की दीवारों में दरारें देखी जा सकती हैं। जगह-जगह से प्लास्टर उखड़ रहा है। छज्जों के लेंटर जर्जर हालत में हैं और बरसात में छतों से पानी टपकता है। कमरों में भी सीलन आ गई है, जिससे गंभीर हादसे का डर रहता है।
व्यवस्थाओं की दृष्टि से चैतन्य विहार के आश्रय सदन की स्थिति भी ठीक नहीं है। दो बिल्डिंग में तीन आश्रय सदनों में लगभग 274 विधवा और बेसहारा महिलाएं निवास कर रहीं हैं। यहां भी कमरों में प्लास्टर झड़ने संबंधी समस्याएं हैं। सफाई भी नहीं रहती है।
उत्तर प्रदेश महिला कल्याण निगम के महाप्रबंधक से जब अमर उजाला ने फोन पर इस बारे में पूछा तो उन्होंने कहा कि मीरा सहभागिनी आश्रय सदन के लीला कुंज और रासविहारी सदन के मरम्मत का कार्य जल्द शुरू किया जाएगा। इसके लिए उन्होंने संस्था हुडको की मदद लेने की बात कही है।
अधिकारी जता चुके हैं असंतोष
12 अप्रैल 2015 को उत्तर प्रदेश महिला कल्याण निगम की प्रमुख सचिव रेणुका चौधरी ने निरीक्षण के दौरान ज्ञानगुदड़ी के भूतगली पुराना पागल बाबा स्थित मीरा सहभागिनी आश्रय सदन की जर्जर स्थिति पर असंतोष जाहिर किया था। उन्हाेंने भी माना कि इमारत बहुत पुरानी है और नहाने व खाना बनाने की व्यवस्था ठीक नहीं हैं। कई महिलाएं अपने कमरों में ही स्टोव पर खाना पकाती मिली थीं। पांच साल पहले बनी चैतन्य विहार आश्रय सदन की इमारत पर भी असंतोष जताया था।
सीएम ने दिए थे तीन करोड़
15 मार्च 2015 को वृंदावन दौरे पर आए मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने आश्रय सदनों की मरम्मत और सुविधाओं के लिए तीन करोड़ रुपये दिए थे। इसके बाद चैतन्य विहार के आश्रय सदनों की मरम्मत के साथ विधवाओं की सुविधा के लिए कार्य शुरू किए गए लेकिन मीरा सहभागिनी आश्रय सदनों की मरम्मत का कार्य नहीं शुरू हुआ।
प्रवेश के लिए अनुमति की जरूरत
सुप्रीम कोर्ट की मानीटरिंग के बाद भी महिलाओं के रहन-सहन और मूलभूत सुविधाओं में कोई बदलाव नहीं आया है। वृंदावन के चैतन्य विहार महिला आश्रय सदन और भूतगली के मीरा सहभागिनी आश्रय सदन में प्रवेश के लिए उत्तर प्रदेश महिला कल्याण निगम से अनुमति लेनी पड़ती है। महिलाएं भी अपनी परेशानी खुलकर बताने से डरती हैं।