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जानिए अक्षय तृतीया को क्यों कहते हैं युगादि तिथि

Thu, 27 Apr 2017 11:43 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला बाह (आगरा)
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अक्षय तृतीया पर खरीदारी करती ‌महिलाएं - फोटो : amar ujala
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‘अक्षय’ का शाब्दिक अर्थ है जिसका कभी नाश न हो। सत्य और परमात्मा अविनाशी हैं, वे अखंड हैं सर्वव्यापी हैं। इसलिए अक्षय तृतीय ईश्वरीय तिथि है। इसी दिन सतयुग, द्वापर और त्रेता युग प्रारंभ हुआ था। इसलिए इस तिथि को युगादि तिथि भी कहते हैं। 
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ज्यातिषाचार्य पूनम वार्ष्णेय के मुताबिक अक्षय तृतीय 28 अप्रैल (शुक्रवार) को सुबह 10.28 बजे प्रारंभ हो रही है। यह तिथि शनिवार सुबह करीब 6.55 बजे तक रहेगी। शुक्रवार को पूरे दिन अक्षय तृतीया होने के कारण पूजन का विधान शुक्रवार को रहेगा। इस दिन माता लक्ष्मी और भगवान विष्णु का पूजन करना चाहिए। पवित्र नदियों में स्नान, सत्तू, शर्बत, जल, खरबूज, तरबूज, छाता, मिठाई, फल आदि के दान का विधान है। सोने की खरीद का विधान है। माना जाता है कि अक्षय तृतीय के दिन खरीदा गया सोना शाश्वत समृद्धि का द्योतक है।  

ज्योतिषाचार्य शिव शरण पाराशर के मुताबिक अक्षय तृतीया (आखा तीज) इस बार 28 व 29 अप्रैल को मनाई जाएगी। 28 अप्रैल को 500 साल बाद सौभाग्य योग तथा छत्र योग का संयोग बन रहा है। 28 अप्रैल  को सुबह 10 बजकर 29 मिनट शुरू होगी, जो अगले दिन  29 अप्रैल को सुबह 6 बजकर 56 मिनट तक रहेगी। अक्षय तृतीया पूजा का शुभ मुहर्त 28 अप्रैल को सुबह 10 बजकर 29 मिनट से लेकर दोपहर 12 बजकर 18 मिनट तक का हैं। जबकि 29 अप्रैल को सुबह 6 बजकर 15 मिनट से 11 बजकर 57 मिनट तक सर्वार्थ सिद्धि योग, 11 बजकर 58 मिनट से सूर्यास्त तक रवि योग रहेगा। इस योग के अतिरिक्त  अमृत सिद्धि,  बुधादित्य  योग भी बन रहे हैं। बटेश्वर के मंदिर महंत जय प्रकाश गोस्वामी ने बताया कि अक्षय तृतीया पर बन रहे विशेष योगों को लेकर शिव मंदिरों में पूजन अनुष्ठान होंगे।   परशुराम जयंती भी मनाई जाएगी अक्षय तृतीया के दिन भगवान परशुराम का जन्म हुआ था। इस अवसर हवन पूजन किया जाएगा। विशेषकर विप्र बंधु पूजन कार्यक्रमों का आयोजन करेंगे। यही नहीं वृंदावन के बांके बिहारी मंदिर में भगवान चरणों के दर्शन होंगे। बांके ठाकुर बांके बिहारी के चरणों के दर्शन वर्ष में एक बार अक्षय तृतीया पर होते हैं। 
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  शादियों की रहेगी धूम अक्षय तृतीया पर अनसूझा सहालग होता है। इस दिन उन लोगों के विवाह होते हैं, जिनके विवाह के लिए कोई शुभ मुहूर्त नहीं मिलता है। अक्षय तृतीया के दिन विवाह करना शुभ होता है। शहर में विवाह समारोहों की तैयारियां हो रही हैं। बारात घरों में जगह नहीं है। एक अनुमान के मुताबिक के शहर में अक्षय तृतीया पर करीब 1000-1200 तक विवाह समारोह आयोजित होंगे। 
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