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सकना में 20 साल से खरंजा पर ठोकर खा रहे ग्रामीण

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गांव सकना में बीस साल पुराने ऊबड़-खाबड़ ईंटों के खरंजे के बीच निकलते लोग - फोटो : MATHURA
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गोवर्धन। मथुरा ब्लाक की छोटी ग्राम पंचायत सकना में विकास की किरण तक नहीं पहुंच सकी है। गांव में बिजली के तार जर्जर लटक रहे हैं और आए दिन टूटते रहते हैं। इससे ग्रामीणों की जान को खतरा बना रहता है। वहीं, गांव में पीने को मीठा पानी तक नहीं है। इसके लिए लोगों को जंगल में कुओं से लाना पड़ता है। पाइप लाइन तो है, लेकिन उसमें आज तक सप्लाई नहीं हुई।
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मथुरा ब्लाक की ग्राम पंचायत सकना पिछली पंचवर्षीय योजना में अलग की गई थी। 3500 आबादी वाली ग्राम पंचायत में 20 साल पहले कुछ गलियों में खड़ंजा लगाया गया था। अब वह खड़ंजा टूट गया है। ऊबड़ खाबड़ हो गया है। इससे आवागमन में परेशानी होती है। घरों से निकलने वाला गंदा पानी गलियों में बहता रहता है।
गांव के हर तिराहे चौराहे पर गंदगी बनी रहती है। गांव में भूगर्भ जल खारी है। मीठे पानी को गांव की महिलाएं दूर तक दौड़ लगाती हैं। गांव में पात्र लोगों को विधवा, विकलांग व वृद्धावस्था पेंशन नहीं मिल रही। विभाग के लोगों ने कभी गांव में कैंप नहीं लगाया। राशन भी लोगों को नहीं मिल रहा।
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ग्रामीण बोले-समस्याएं बहुत हैं, लेकिन सुनने वाला कोई नहीं
गांव में मीठे पानी के कोई इंतजाम नहीं है। पीने को मीठा पानी दूर से लाना पड़ता है। मीठे पानी को छह साल पहले पाइप लाइन बिछाई थी। उससे आज तक पानी नहीं मिला। सुबह से महिलाएं पानी की जुगाड़ में घूमती रहती हैं। समस्या को सुनने वाला कोई नहीं है। -गंगाराम निवासी सकना
गांव में कोई विकास कार्य नहीं कराए जा रहे। पंचायत सचिव और प्रधान ठोस विकास योजना नहीं बना रहे। गलियों में कीचड़ और गंदगी बनी रहती हैं। इससे लोगों को आवागमन में परेशानी होती है।-गोपी निवासी गांव सकना
गांव में बिजली के तार जर्जर लटक रहे हैं, जो आए दिन टूटते रहे हैं और घटनाएं हो जाते हैं। इसे लेकर कई बार अफसरों को अवगत कराया, लेकिन आज तक तार बदले नहीं गए। समस्या का हल नहीं निकल पा रहा है। बिजली अफसर भी गांव में नहीं आते। -संतोष उपाध्याय निवासी सकना
गांव में वृद्धावस्था पेंशन, विधवा पेंशन के सैकड़ों लोग पात्र हैं लेकिन उनको योजनाओं का लाभ नहीं मिल रहा। गांव में सभी लोगों के शौचालय भी नहीं बने हैं। ग्रामीण खुले में शौच जाने को मजबूर हैं। समस्या को सुनने के लिए कोई तैयार नहीं है। -राजवती निवासी गांव सकना
कोट
-गांव में 27 लाख रुपये विकास कार्यों पर खर्च किए हैं। मनरेगा मजदूरों के खातों और नामों में समानता न होने के चलते दिक्कत आ रही है। आगे विकास कार्य कराने की योजना बनाई गई है।
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- हरिमोहन गौतम, ग्राम प्रधान सकना
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