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बांकेबिहारी मंदिर में फिर टूटी परंपरा

Wed, 20 Apr 2016 11:22 PM IST
अमर उजाला वृंदावन
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बांकेबिहारी मंदिर - फोटो : अमर उजाला वृंदावन
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ठाकुर बांकेबिहारी मंदिर के सेवायत गौरव गोस्वामी ने मंदिर प्रबंधन पर मंदिर की प्राचीन परंपरा को तोड़ने का आरोप लगाया है। उनके अनुसार मंदिर प्रबंधन ने सेवायतों के घर से दोपहर को ठाकुरजी को लगाए जाने वाले कच्चे भोजन प्रसाद को बुधवार को बाहरी व्यक्तियों से मंदिर की रसोई में तैयार कराकर परंपराओं को तोड़ा है। मंदिर की रसोई में सिर्फ अपरस सेवायत और उनके परिवार के लोगों को ही प्रवेश करने का अधिकार है। अभी तक वही ठाकुरजी का प्रसाद तैयार करते आए हैं।
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गौरव गोस्वामी ठाकुर बांकेबिहारी मंदिर प्रबंध कमेटी के अध्यक्ष भी रह चुके हैं। उनका आरोप है कि मंदिर प्रबंधन ने बुधवार को मंदिर की शुद्ध रसोई में बाहरी व्यक्तियों से ठाकुरजी का प्रसाद (कच्ची रसोई) भोजन तैयार कराया। मंदिर प्रबंध कमेटी के अध्यक्ष के आदेश पर ऐसा किया गया। उन्होंने मंदिर प्रबंधन के कार्यालय में लिखित में विरोध दर्ज कराया है। वे इस मामले में न्यायालय की शरण भी लेंगे। परंपरा टूटने पर रोष जताते हुए अतुल कृष्ण गोस्वामी, ब्रजेश कुमार गोस्वामी, ब्रजकिशोर गोस्वामी, रसिक वल्लभ गोस्वामी, राजकुमार गोस्वामी, विनोद बिहारी गोस्वामी, विजय कृष्ण गोस्वामी आदि ने भी प्रबंधन को हस्ताक्षरित पत्र दिया है। 

वहीं बांके बिहारी मंदिर प्रबंध कमेटी के अध्यक्ष नंद किशोर उपमन्यु का कहना है कि मंदिर प्रबंधन ने किसी प्रकार की परंपरा को नहीं तोड़ा है। गोस्वामी परिवार के ठाकुरजी के भोजन प्रसाद को बनाने में रुचि न दिखाने पर ही कुछ गोस्वामियों की सलाह पर कंठी धारक सारस्वत ब्राह्मण भंडारी से प्रसाद तैयार कराया गया, क्योंकि ठाकुरजी को भूखा नहीं रख सकते थे। उन्होंने कहा कि जो सेवायत मंदिर की परंपरा को तोड़ने की बात कर रहे हैं वे ठाकुरजी के प्रसाद की जिम्मेदारी लेने को तैयार क्यों नहीं हो रहे। उन्होंने बांके बिहारी मंदिर के समस्त सेवायत गोस्वामियों को भोजन बनाने के लिए आमंत्रित किया, इसके लिए इश्तहार भी दिए। इसके बाद भी किसी ने जिम्मेदारी नहीं ली। अगर सेवायतों को इस पर आपत्ति है तो वह अपने आदेश वापस लेते हैं। 
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दोनों समय निवेदित होता है भोजन
ठाकुर बांकेबिहारी मंदिर में बांके बिहारी महाराज को दो समय का भोजन निवेदित किया जाता है। दोपहर की रसोई में कच्चा प्रसाद और शाम को पक्का प्रसाद का भोग लगाया जाता है। दोनों समय के भोजन को मंदिर की रसोई में मंदिर के सेवायतों की पत्नी तैयार करती हैं। ठाकुरजी को निवेदित किए जाने वाले प्रसाद पर होने वाले खर्चे का वहन बड़ी हवेली के सेठ राधेश्याम बेरीवाला की ओर से उठाया जाता है।

मंदिर प्रबंधन की स्कीम का दिया हवाला
वृंदावन। ठाकुर बांके बिहारी के सेवायत गौरव गोस्वामी ने मंदिर प्रबंध कमेटी के अध्यक्ष नंदकिशोर उपमन्यु को दिए पत्र के अनुसार 31 मार्च, 1939 को मंदिर प्रबंधन की स्कीम में वर्णित उद्देश्य के पैरा संख्या दो के अनुसार मंदिर प्रबंध समिति को मंदिर में प्रचलित प्राचीन परंपराओं का यथावत अनुपालन करने के लिए व्यवस्था करने का अधिकार है परंतु अन्य लोगों की नियुक्ति कर कच्ची रसोई/प्रसाद तैयार कराने से परंपरा का उल्लंघन हुआ है।


अपरस
वृंदावन। अपरस सेवायत पर मंदिर सेवायत ब्रज किशोर गोस्वामी ने बताया कि जो सेवायत ठाकुरजी की सेवा या भोजन निर्माण में जाएगा वह शुद्ध होना चाहिए। वो किसी को छू भी नहीं सकता। सेवायत के पहनने वाले रेशमी कपडे़ जैसे कुर्ता, धोती, बनियान और बगलबंदी भी शुद्ध होने चाहिए।
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पूर्व में भी टूटी परंपराएं
03 जनवरी, 2015: सेवायत ने राजभोग दर्शनों में बनाया कृत्रिम फूल बंगला
07 जनवरी, 2015: श्रद्धालुओं को जगमोहन से दर्शन कराया, सेवायत से मांगा स्पष्टिकरण
20 जनवरी, 2015: श्रद्धालुओं को जगमोहन में लगे कटघरे के अंदर से कराए दर्शन, मंदिर प्रबंधन ने सेवायत को नोटिस देकर लगाया दंड
30 जून, 2015: मुख्य सचिव, प्रशासनिक अधिकारियों को मंदिर परिसर में कराया भोजन
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