मथुरा। जिले में बृहस्पतिवार दोपहर से शुरु हुई बारिश रुक-रुक कर शुक्रवार सुबह तक जारी रही। हालांकि दोपहर में बारिश थमने के बाद जनजीवन सामान्य हो गया। इससे खेतों में फसलों को नुकसान के साथ मंडियों में हजार क्विंटल धान की फसल भीगने से किसानों व आढ़तियों को नुकसान उठाना पड़ा।
अचानक बिगड़े मौसम से कामकाजी और नौकरीपेशा लोगों को गंतव्यों तक जाने में परेशानी का सामना करना पड़ा। दोपहर में धूप खिलने के बाद लोगों ने राहत ली। बारिश से मंडी के बी और सी ब्लाक में कई जगह जलभराव हो गया। इसमें हजारों क्विंटल धान भीग गया। काफी धान जलभराव में तैर गया। यहां देर शाम तक 5 पंपों और से पानी निकाला जा रहा था। दोपहर में यहां पहुंचे सिटी मजिस्ट्रेट अनुपम मिश्रा एवं सचिव रेनू वर्मा ने निरीक्षण कर जलनिकासी के निर्देश दिए।
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मंडी में अब तक 713107 क्विंटल धान की आवक हो चुकी है। प्रतिदिन 40 हजार क्विंटल धान आ रहा है। दो दिन की बारिश में बी और सी ब्लॉक में जलभराव से धान की फसल में नुकसान हुआ है। -रेनू वर्मा, सचिव, मंडी समिति
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खरीफ में 7 से 10 प्रतिशत नुकसान
मथुरा। दो दिन की बेमौसम बारिश के कारण खेतों में पकी खड़ी खरीफ की पिछाई फसल खराब हो गई है। संयुक्त सर्वेक्षण में फसलों में करीब 7 से 10 प्रतिशत तक नुकसान दर्ज किया गया है।
कृषि के साथ राजस्व और फसल बीमा कंपनी के अधिकारियों ने वर्षा से फसलों के नुकसान का सर्वे आरंभ कर दिया है। अब तक काफी किसानाें ने फसलों की कटाई कर ली है। वहीं खेतों में खड़े या कटे पड़े धान, बाजरा, कपास में 7 से 10 प्रतिशत तक नुकसान दर्ज किया गया है। संयुक्त टीमों द्वारा जिले के छाता, नंदगांव, फरह विकास खंडों में सर्वे कर लिया है वहीं शेष विकास खंडों में सर्वे शनिवार को पूरा हो जाने उम्मीद है। वर्षा से रबी की फसल की अगैती बुवाई भी बर्बाद हो गई है। अब तक करीब 40 प्रतिशत सरसों की बुवाई हो चुकी है। आलू की बुवाई भी कई जगह शुरु हो गई है। इससे किसानों की मेहनत पर पानी फिर गया है। इन किसानों को अब दोबारा बुवाई की मेहनत करनी पड़ेगी।
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बारिश से खराब हुई फसलों का सर्वे कराने के राजस्व, कृषि एवं बीमा कंपनी के अधिकारियों को निर्देश दिए हैं। तीन ब्लॉक का सर्वे हो गया है। शेष ब्लॉक के सर्वे के बाद पूरी स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। -आवेश कुमार सिंह जिला कृषि अधिकारी
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जिले में 14 अक्तूबर तक वर्षा का आंकड़ा
जिले में जून से अक्तूबर तक सामान्यत: 489.2 मिमी वर्षा होती है। इस वर्ष 14 अक्तूबर तक सामान्य से भी 57.2 प्रतिशत कम 279.8 मिमी ही बारिश हुई है। इससे खरीफ की फसलों में नुकसान हुआ था। वहीं गत वर्ष 14 अक्तूबर तक सामान्य से भी 118.9 प्रतिशत अधिक 581.9 मिमी बारिश दर्ज हुई थी।