मरीजों के लिए फ्री अल्ट्रासाउंड जांच की सुविधा की घोषणा मजाक बन गई है। मथुरा के तीन बड़े सरकारी अस्पतालों में अल्ट्रासाउंड मशीन तो हैं लेकिन रेडियोलॉजिस्ट के अभाव में इन मशीनों पर ताला लटका है। 2100 रोगियों की ओपीडी वाले इन अस्पतालों में मरीज दर-दर भटकते हैं।
महर्षि दयानंद अस्पताल में प्रतिदिन आने वाले रोगियों की संख्या का आंकड़ा एक हजार से 1200 तक है। इस अस्पताल में रेडियोलॉजिस्ट का पद लंबे समय से खाली है। नतीजा ये कि यहां अल्ट्रासाउंड नहीं हो पा रहे हैं।
जब कभी चिकित्सक अल्ट्रासाउंड लिखते हैं तो मरीजों को मजबूरन निजी लैब पर अल्ट्रासाउंड कराना पड़ता है।
वहीं महिला अस्पताल में औसतन प्रतिदिन 200 से 250 महिलाएं आती हैं।
प्रसव की जांच के लिए अल्ट्रासाउंड प्राथमिकता वाली जांच है। यहां भी रेडियोलॉजिस्ट का एकमात्र पद रिक्त है। ऐसे में गरीब महिलाओं को भी बाहर अल्ट्रासाउंड कराना पड़ रहा है।
बसपा सरकार में बना सौ शैय्या अस्पताल के हालात भी लगभग ऐसे ही हैं। यहां भी अल्ट्रासाउंड मशीन पर ताला लटका है। यहां प्रतिदिन 700 रोगी उपचार के लिए आ रहे हैं।
रेडियोलॉजिस्ट का पद लंबे समय से खाली पड़ा है। इसी के चलते अल्ट्रासाउंड नहीं हो पा रहे है। हम लगातार शासन से पत्राचार कर रहे है।
डा. केपी गर्ग
सीएमएस महर्षि दयानंद अस्पताल
महिला अस्पताल में रेडियोलॉजिस्ट का एक मात्र पद खाली है। यहां प्रसव से पीड़ित महिलाओं को जांच की आवश्यकता पड़ती है। हमने लगातार शासन को समस्या से अवगत कराया है।
डा. बीडी भास्कर
सीएमएस, महिला अस्पताल
सौ शैय्या अस्पताल में अल्ट्रासाउंड की मशीन तो है लेकिन मानव संसाधन के अभाव में मरीजों के अल्ट्रासाउंड नहीं हो पा रहे हैं। मरीजों को बाहर अल्ट्रासाउंड करवाने पड़ रहे हैं।
डा. एके पालीवाल
सीएमएस, सौ शैय्या अस्पताल