मथुरा कोषागार में छह मृतकों की पेंशन अपने खातों में लेकर करीब 2.67 करोड़ रुपये का घोटाला करने के आरोपी सहायक लेखाकार के विभिन्न पटलों पर कराए गए कार्यों की जांच की जा रही है। लेखाकार छह साल में विभिन्न पटलों पर कार्य कर चुका था। ऐसे में इन सभी फाइलों को खंगाला जा रहा है।
कोषागार घोटाले का आरोपी सहायक लेखाकार वर्ष 2016 से मथुरा के कोषागार में विभिन्न पटलों पर कार्यरत रहा है। एडी पेंशन की जांच टीम उसके विभिन्न पटलों पर कार्य की फाइलों की जांच भी करेगी। कहीं अन्य पटलों पर भी तो आरोपी ने कोई फर्जीवाड़ा नहीं किया है। यह देखा जाएगा।
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बुधवार को कोषागार में पहुंची जांच टीम ने आरोपी के पटलों की फाइलों का भी लेखा जोखा चेक किया। ऐसे में जांच का दायरा बढ़ गया है। यही कारण है कि जांच टीम ने जांच का समय बढ़ा दिया है। दूसरी ओर, जांच टीम को यह भी जानकारी मिली है कि उक्त लेखाकार ने घोटाले की शुरुआत अपने खाते से पहले अपने दो करीबियों के खातों में पेंशन की रकम भेजी थी।
जांच का दायरा अब इन करीबियों तक पहुंच सकता है। प्राथमिकी में इन करीबियों को भी शामिल किया जाएगा। करोड़ों के घोटाले की जांच में पूर्व कोषाधिकारियों के साथ ही आरोपी से पहले पटल पर रहे लेखाकार की जांच भी की जाएगी।
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जांच टीम के सदस्यों का कहना है कि सहायक लेखाकार को कई बार नोटिस देकर अपना पक्ष रखने को कहा गया है, लेकिन वह अभी तक जांच टीम के सामने पेश नहीं हुआ है। इस मामले में जांच पूरी होने के बाद आरोपियों के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज की जाएगी। इसके बाद मुख्य आरोपी से रिकवरी की कार्रवाई की जा सकती है।