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Mathura News: सात साल से अपने खाते में ट्रांसफर कर रहा था पेंशन की रकम

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मथुरा। कोषागार का गायब सहायक लेखाकार सात साल से छह मृतकों की पेंशन अपने खाते में ट्रांसफर कर रहा था। कोरोना काल में फाइलें चैक नहीं होने का फायदा उठाकर मृतकों के फर्जी जीवित प्रमाण पत्र लगाए और अपना बैंक खाता अपडेट कर दिया। अपने खाते में पेंशन भुगतान का खेल शुरू कर दिया। प्रारंभिक जांच में करीब सात साल में डेढ़ करोड़ रुपये के घोटाले की आशंका है। मामले की जांच जारी है।
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शनिवार को अपर निदेशक (एडी) पेंशन, आगरा महिमा चंद्र ने कोषागार कार्यालय में अभिलेखों की जांच पड़ताल कर कर्मचारियों से पूछताछ की थी। सोमवार को भी उन्हें जांच के लिए मथुरा आना था लेकिन किसी कारण से वह नहीं आ सके। अब वह मंगलवार को फिर से कर्मचारियों से पूछताछ और संबंधित अभिलेखों की जांच के लिए कोषागार आ सकते हैं। हालांकि एडी पेंशन ने प्रारंभिक जांच में पाया कि 2019 में कोरोना काल में फाइल चैक न होने का फायदा उठाकर सहायक लेखाकार ने छह मृतकों के फर्जी जीवित प्रमाण पत्र व अन्य दस्तावेज तैयार किए। इसके बाद बैंक खाता अपडेट करके अपने खाते में पेंशन की रकम भुगतान करता रहा। इसके लिए उसने छह ऐसे मृतकों के पेंशन खाते तलाशे जिनकी पेंशन हमेशा के लिए बंद होने वाली थी।
लेखाकार ने अपने शातिर दिमाग से घोटाले का खेल शुरू कर दिया। 2019 से बीती 17 जनवरी तक यह खेल चलता रहा। जिम्मेदार इस खेल को पकड़ नहीं पाए। इस दौरान दो कोषाधिकारी भी बदल गए, एक का यहां से तबादला हो गया और दूसरे बीती 31 जनवरी को सेवानिवृत्ति हो गए। अब एजी पेंशन प्रयागराज कार्यालय के अधिकारियों ने सीटीएस सॉफ्टवेयर (चेक ट्रांजेकेशन सिस्टम) सॉफ्टवेयर से यह खेल पकड़ लिया। तकनीकी माध्यम से परखे गए वित्तीय भुगतान में विसंगतियां मिलने पर 19 जनवरी को ही एजी पेंशन की टीम मथुरा आ धमकी। तीन दिन तक टीम ने संबंधित दस्तावेज जांचे और डेटा अपने कब्जे में लिया। इसके बाद एजी पेंशन प्रयागराज ने एडी पेंशन आगरा महिमा चंद्र को मामले की जांच सौंपी है।
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वरिष्ठ कोषाधिकारी अतुल पांडेय ने बताया कि मंगलवार को एडी फिर से जांच करने के लिए मथुरा आएंगे और संबंधित दस्तावेज व डेटा चैक करेंगे। हालांकि प्रारंभिक जांच में डेढ़ करोड़ रुपये का गबन माना जा रहा है, जांच पूरी होने के बाद ही गबन की रकम स्पष्ट हो सकेगी।
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