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Mathura News: ब्रज में लुप्त हो रही पारंपरिक मल्ल विद्या

Wed, 03 May 2023 12:46 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, मथुरा
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मथुरा। ब्रज की पारंपरिक मल्ल विद्या लुप्त हो रही है। कारण यह मिट्टी के अखाड़ों से निकल कर गद्दों पर पहुंच गई है। मिट्टी के अखाड़ों में अभ्यास करने वाले पहलवान अब कम ही दिखाई देते हैं। मिट्टी के अखाड़ों से निकले पहलवान बेहतरीन प्रदर्शन से जिले को गौरवान्वित करते रहे हैं। लेकिन अब यह विद्या लुप्त होने के कगार पर है। अब मिट्टी के अखाड़ों में पहलवानों का अभ्यास करना कम होता जा रहा है। इसका कारण जिले से लेकर राज्य, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर तक होने वाली कुश्तियां गद्दों पर ही होती हैं। इनमें मिट्टी के अखाड़ों में अभ्यास करने वाले पहलवान अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाते हैं और अन्य पहलवानों की अपेक्षा पिछड़ जाते हैं।
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मिट्टी के अखाड़ों में कुश्ती का अभ्यास करने वाले बेहतरीन पहलवानों में कैप्टन मुख्तियार, इंस्पेक्टर शिवाले पहलवान, मोहन पहलवान, उमेश पहलवान, देवेंद्र पहलवान, हरेंद्र पहलवान सहित अन्य स्तरीय पहलवान शामिल रहे हैं। इन्होंने विभिन्न स्तर पर कुश्तियां जीतकर जिले को गौरवान्वित किया हैं। इनमें कै. मुख्तियार पहलवान को स्पोर्ट्स कोटे से कुश्ती वर्ग में फौज में नौकरी मिली थी। इन्होंने कॉमनवेल्थ गेम्स में दो स्वर्ण पदक भी जीते थे। इन्हें अर्जुन अवार्ड से सम्मानित किया गया।
शिवाले पहलवान को स्पोर्ट्स कोटे से सीआईएसएफ में नौकरी मिली। वर्ष 2016 में इन्होंने वीआरएस ले लिया और वर्तमान में गोपाल आश्रम अखाड़ा संचालित कर रहे हैं। इस अखाड़े में दर्जनों युवक-युवतियां मिट्टी के अखाड़े और गद़दों दोनों पर पहलवानी का अभ्यास कर रहे हैं।
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स्व. मोहन पहलवान भी नामी पहलवान रहे हैं। इनकी पहलवानी के कई किस्से मशहूर हैं। इनके नाम पर जिले के एकमात्र स्पोर्ट्स स्टेडियम का नाम रखा गया। वर्तमान पहलवानों में देवेंद्र पहलवान निवासी कचनऊ बलदेव स्पोर्ट्स कोटे से एमपी पुलिस में तैनात हैं जबकि भाई हरेंद्र पहलवान ने फौज में नौकरी हासिल की थी। वर्तमान में हरेंद्र साईं की तरफ से खेलो इंडिया में कोच हैं।
गोपाल आश्रम अखाड़े का संचालन कर रहे शिवाले पहलवान कहते हैं कि मिट्टी पर अब पहलवानों के कम अभ्यास करने का बड़ा कारण है कि सरकारी चैंपियनशिप मिट्टी में नहीं वरन गद्दों पर होती हैं। गद्दों पर होने वाली कुश्ती में प्वाइंट पर हार जीत होती है। जबकि मिट्टी के अखाड़े में हार जीत कम ही हो पाती है। यहां परिणाम नहीं मिल पाता है। इसके चलते अब मिट्टी के अखाड़ों में कुश्ती का अभ्यास कम ही पहलवान करते हुए दिखते हैं।
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