दुकानों के सामने प्रशासन द्वारा लगाई गई बैरिकेडिंग।
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उत्तर प्रदेश के तीर्थनगरी मथुरा के वृंदावन में पिछले दिनों नगर निगम प्रशासन द्वारा बांकेबिहारी मंदिर मार्ग में लगवाई गई लोहे की बैरिकेडिंग स्थानीय लोगों और व्यापारियों के लिए मुसीबत बन गई है। बैरिकेडिंग के विरोध में मंगलवार को बांकेबिहारी मंदिर के आसपास के व्यापारियों ने अपने-अपने प्रतिष्ठान बंद रखकर रोष जताया। वहीं आए दिन की समस्या झेल रहे व्यापारियों और स्थानीय लोगों के सब्र का बांध जवाब दे गया। गुस्साए लोगों ने बैरिकेडिंग उखाड़ फेंकी।
व्यापारियों के विरोध के बाद प्रशासन बैकफुट पर आ गया और बैरिकेडिंग को हटवाना शुरू कर दिया। पिछले दिनों जिला प्रशासन के आदेश के बाद नगर निगम प्रशासन द्वारा विद्यापीठ चौराहे से बांकेबिहारी पुलिस चौकी के निकट तक समानांतर बैरिकेडिंग लगा दी गईं थी। इससे जहां स्थानीय लोगों को परेशानी हो रही थी, वहीं बाजार पूरी तरह ठप हो गया। स्कूलों की वैन नहीं आने से अभिभावक बच्चों को स्कूल छोड़ने और लेने जाने के लिए मजबूर थे।
प्रशासन स्थानीय लोगों के साथ बैठकर बनाए योजना
व्यापारियों ने मंगलवार को विद्यापीठ चौराहा से लेकर बांके बिहारी मंदिर तक का बाजार बंद कर विरोध जताया गया। व्यापारियों की मांग है कि इस बैरिकेडिंग के कारण व्यापार ठप हो गया है। अतुल श्रीवास्तव ने कहा कि प्रशासन स्थानीय लोगों के साथ बैठकर योजना बनाए, ना कि उनको परेशान करने लगे। राहुल शुक्ला ने कहा कि यह रेलिंग हटनी चाहिए। किसी कीमत पर इसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
बैरिकेडिंग से व्यापार चौपट हो गया
दीपक पराशर ने बताया कि प्रशासन कभी गेट लगा देता है, कभी बैरिकेडिंग तो कभी रेलिंग। व्यापारी गोपाल खंडेलवाल, नीरज गौतम, भोला गौतम, प्रिंस, गोविंद खंडेलवाल, सोनू ने कहा कि इस बैरिकेडिंग से व्यापार चौपट हो गया है। आम नागरिकों और व्यापारियों के विरोध के बाद प्रशासन बैकफुट पर आ गया। प्रशासन ने विरोध को देखते हुए बैरिकेडिंग को हटवाना शुरू कर दिया। इससे व्यापारियों में ख़ुशी की लहर दौड़ गई और सभी ने ठाकुर बांके बिहारी के जयकारे लगाए।
600 घर और 250 दुकान हो रही प्रभावित
वृंदावन स्थित ठाकुर बाके बिहारी मंदिर मार्ग पर लगाई गई बैरिकेटिंग से लगभग 600 घरों में रहने वाले लोग और 250 से अधिक व्यापारी परेशान थे। व्यापारियों का व्यापार ठप हो गया है तो वहीं स्थानीय निवासियों का घरों से निकलना मुश्किल हो चला था। बच्चों को स्कूल की गाड़ी तक छोड़ने के लिए एक किलोमीटर तक जाना पड़ा।