आगरा-मथुरा रेलखंड पर बाद रेलवे स्टेशन के पास ट्रेन की चपेट में आकर ट्रैक मैन अजय कुमार की मौत के मामले में विभागीय जांच शुरू कर दी गई है। जीआरपी ने प्रथम दृष्टया इसे हादसा बताया है। ट्रैक पर किसी तरह का कॉशन लेकर कार्य नहीं करने पर विभागीय अधिकारियों की लापरवाही को भी माना जा रहा है।
लक्ष्मी नगर, गोविंद नगर निवासी ट्रैक मैन अजय बुधवार को अपने अन्य साथियों के साथ ट्रैक पर मेंटिनेंस का कार्य कर रहे थे। इसी दरम्यान सचखंड एक्सप्रेस की चपेट में आकर उनकी मौत हो गई थी। परिजन ने ट्रैक पर धक्का देकर हत्या करने का आरोप लगाया था। रेलवे ट्रैक पर हंगामा किया था। रेलवे अधिकारियों ने जांच का आश्वासन दिया था। जीआरपी के सााथ ही रेलवे की टीम भी मामले की जांच कर रही हैं। जीआरपी इंस्पेक्टर यादराम का कहना है कि प्रथम दृष्टया यह हादसा प्रतीत हो रहा है। जांच की जा रही है।
ट्रैक पर मेंटिनेंस के दौरान क्यों नहीं लगाया कॉशन
जीआरपी अधिकारियों का कहना है कि सामान्य तौर पर ट्रैक पर मेंटिनेंस करने से पहले कॉशन (लाल रंग का बैनर) लगाया जाता है। हालांकि ट्रैक की छुटपुट कार्य बिना कॉशन लिए ही कर दिए जाते हैं। बुधवार को कार्य के दौरान कॉशन क्यों नहीं लगाया गया। ज्यादातर मामलों में गैंग मैन आदि को यह जानकारी होती है कि ट्रेन किस ओर से और कितनी देर में आएगी। इस मामले में रेलवे अफसरों की लापरवाही की जांच की जा रही है।
सवाल यह भी है कि ट्रेन के हॉर्न की आवाज क्यों सुनाई नहीं पड़ी। इस पर साथ काम कर रहे कर्मचारियों का कहना था कि उसी वक्त यार्ड में आई एक ट्रेन का हॉर्न भी बज रहा था। हो सकता है कि कर्मचारी ने दूसरी ट्रेन के हॉर्न को भी इसी ट्रेन का समझा हो और ध्यान नहीं दे पाया हो। जनसंपर्क अधिकारी प्रशस्ति श्रीवास्तव का कहना है कि घटना गंभीर है। इसकी जांच की जा रही है। लापरवाही पर कार्रवाई की जाएगी।