वृंदावन के श्रीबांकेबिहारी मंदिर कॉरिडोर और प्रस्तावित ट्रस्ट को लेकर उत्पन्न विवाद की गूंज लखनऊ तक पहुंची है। आलाकमान के निर्देश पर शुक्रवार को मंडलायुक्त शैलेंद्र कुमार सिंह, डीआईजी शैलेश कुमार पांडेय, डीएम सीपी सिंह और एसएसपी श्लोक कुमार सेवायतों को समझाने पहुंचे। काफी देर संवाद चला लेकिन सेवायतों ने साफ कहा कि ट्रस्ट का विरोध जारी रहेगा। जिस मंदिर को उनके पूर्वजों ने जीवन भर संभाला उसे ऐसे ही नहीं दिया जा सकता है।
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शुक्रवार को इन सभी अधिकारियों ने श्रीबांकेबिहारी मंदिर के प्रांगण में गोस्वामी समाज के प्रमुख प्रतिनिधियों से संवाद किया। इस बैठक का उद्देश्य सरकार की योजनाओं के प्रति गोस्वामी समाज की आपत्तियों को समझना और समाधान का रास्ता निकालना था। करीब एक घंटे चली इस बैठक में गोस्वामियों ने अधिकारियों के समक्ष स्पष्ट रूप से कहा कि वे ट्रस्ट के गठन का विरोध जारी रखेंगे, क्योंकि ठाकुर बांकेबिहारी मंदिर एक निजी स्वामित्व वाली धार्मिक संपत्ति है जिसे उनके पूर्वजों ने अपने जीवन भर की सेवा से संभाला और संरक्षित किया है।
उनका कहना था कि सरकारी हस्तक्षेप न केवल उनकी परंपरा और आस्था पर आघात है, बल्कि यह संवैधानिक रूप से भी अनुचित है। इसलिए न्यास कतई स्वीकार नहीं है। गोस्वामी समाज ने सुझाव दिया कि यदि सरकार को श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए कॉरिडोर बनाना ही है तो उसे यमुना नदी की ओर स्थित सरकारी भूमि पर विकसित किया जाए, न कि मंदिर के आसपास की कुंज गलियों, मकानों और दुकानों को तोड़कर।
उन्होंने कहा कि ऐसा करना धार्मिक अपराध के समान होगा और इससे ठाकुरजी के ऊपर पाप आएगा, जिसे वे किसी सूरत में नहीं होने देंगे। साथ ही उन्होंने इस बात पर भी आपत्ति जताई कि मंदिर के दान या संसाधनों का उपयोग कॉरिडोर निर्माण में नहीं किया जाना चाहिए।
कमिश्नर ने संवाद के बाद मीडिया को बताया कि प्रशासन सभी पक्षों की बातों को गंभीरता से सुन रहा है। उन्होंने कहा कि हम गोस्वामी समाज से उनकी सभी आपत्तियां और सुझाव लिखित रूप में मांग रहे हैं ताकि उन्हें मुख्यमंत्री और शासन तक पहुंचाया जा सके। फिलहाल यह बातचीत का दौर है और किसी भी निर्णय से पहले सभी पक्षों को भरोसे में लिया जाएगा।
डीआईजी ने भी कहा कि कानून-व्यवस्था बनाए रखना प्रशासन की प्राथमिकता है और मंदिर के महत्व को समझते हुए किसी भी प्रकार की जबरदस्ती नहीं की जाएगी। महंत मधु मंगल शरण दास ने कहा कि आप लोग जो न्यास बना रहे हैं, वह ठीक नहीं है। हमारे मंदिर की सेवा पद्धति का ध्यान केवल यहां के सेवायत ही रख पाएंगे। बाहरी का कोई काम नहीं।
सेवायत हिमांशु गोस्वामी ने कहा है कि अधिकारियों को पूरी सेवा पद्धति से लेकर कोर्ट के पुराने आदेशों के बारे में समझाया। स्थिति यह है कि सेवायत किसी भी सूरत में न्यास और कॉरिडोर के लिए तैयार नहीं हैं। सभी ने एलान किया कि हमारा विरोध जारी रहेगा। जिलाधिकारी ने अंत में सभी से कहा कि शासन प्रशासन किसी का बुरा नहीं करेगा, आप लोग थोड़ा समझें और कोई आपत्ति हो तो लिखित में बताएं।