याचिकाकर्ता महंत मधुमंगल शरणदास शुक्ल की ओर से इलाहाबाद उच्च न्यायालय में यमुना रिवर फ्रंट विकास योजना को लेकर दायर जनहित याचिका पर सुनवाई आज होनी है।
याचिकाकर्ता के अनुसार दुनिया में किसी भी नदी के बाढ़ क्षेत्र में सीवर लाइन नहीं डाली गई है। वृंदावन में धार्मिक नदी की आस्था के साथ खिलवाड़ हो रहा है। याचिका में कहा गया है कि यमुना नदी, प्राचीन घाटों के साथ नदी के बाढ़ क्षेत्र में हो रहे अतिक्रमण और वृंदावन में धरोहरों को क्षति पहुंचाई जा रही है।
बीती छह अक्तूबर को जस्टिस अरुण टंडन और जस्टिस सुनीता अग्रवाल की खंडपीठ ने याचिका पर सुनवाई करते हुए 12 प्रतिवादियों को 20 अक्तूबर तक अपना पक्ष रखने को कहा था। उच्च न्यायालय ने केंद्रीय पर्यावरण एवं वन मंत्रालय, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, राष्ट्रीय नदी संरक्षण निदेशालय, प्रदेश के मुख्य सचिव, प्रदेश के पर्यटन सचिव, शहरी विकास मंत्रालय के विशेष सचिव, उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग, लोक निर्माण विभाग, राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के चेयरमैन, मंडालयुक्त आगरा, डीएम मथुरा, ईओ नगर पालिका वृंदावन को नोटिस जारी किया है। याचिका पर दोबारा सुनवाई आज होगी।
निर्माण कार्य रुका
मुख्यमंत्री के ड्रीम प्रोजेक्ट यमुना रिवर फ्रंट विकास योजना का कार्य बुधवार को रोक दिया गया। मामले में आज हाईकोर्ट में होने वाली सुनवाई को प्रमुख कारण माना जा रहा है। बुधवार को यमुना के घाटों पर सैकड़ों की तादात में मजदूर और दर्जनों मशीनें कार्य करती नहीं दिखीं। कार्यदायी संस्था सिंचाई विभाग के एक्सईएन एसके गोयल ने बताया कि हाईकोर्ट के नोटिस की कापी विभाग को मंगलवार की शाम प्राप्त हुई है। इसके बाद ही बुधवार को विकास कार्य को रोक दिया गया। उन्होंने कहा कि 20 अक्तूबर को सुनवाई के बाद ही आगे का कार्य संभव है।
यमुना रक्षकदल बनेगा पक्षकार
यमुना रक्षक दल अब यमुना रिवर फ्रंट विकास योजना के संबंध में हाईकोर्ट में पक्षकार बनेगा। यमुना रक्षकदल के राष्ट्रीय अध्यक्ष संत जयकृष्ण दास महाराज ने कहा कि यमुना के शुद्धीकरण और उसके अस्तित्व को बचाए रखने के लिए यमुना रक्षकदल हर लड़ाई लड़ता आया है और आगे भी लड़ेगा। वृंदावन की संपूर्ण जनता की यही मांग है कि प्रदेश सरकार द्वारा शुरू की गई यमुना रिवर फ्रंट विकास योजना का यह काम होना चाहिए। इसके लिए यमुना रक्षक दल विकास योजना के पक्ष में हाईकोर्ट में पक्षकार बनेगा।