कैंसर का शिकंजा मथुरा के लोगों पर भी तेजी से कसता जा रहा है। अनुमानित आंकड़ों का स्याह सच ये है कि मथुरा में हर दिन कैंसर का नया रोगी सामने आ रहा है। इनमें नई पीढ़ी की संख्या भी अच्छी-खासी है। इसकी बड़ी वजह पान मसाले का बढ़ता सेवन बताया जा रहा है। धरती के गर्भ का दूषित हो रहा जल कोढ़ में खाज साबित हो रहा है।
जनपद में पैथोलॉजी में हो रही जांचों के आंकड़ों से ये बात सामने आती है। जिले में कैंसर के इलाज की सुविधा नहीं है। यहां रोगियों की बायोप्सी के बाद उनको इलाज के लिए दिल्ली, आगरा ही रेफर कर दिया जाता है। मासिक आंकड़ों पर गौर करें तो हर पैथोलॉजी में बायोप्सी में तीन से चार मरीज को कैंसर पाया जा रहा है। जिले में छह से अधिक पैथोलॉजी हैं। इस तरह महीने में तीस से अधिक रोगी कैंसर के पाए जा रहे हैं। हालांकि मथुरा में बायोप्सी का चलन कम है। अन्यथा ये आंकड़ा और भी भयावह हो सकता है।
रंगेश्वर पैथोलाजी के चिकित्सक डा. मोहित गुप्ता के अनुसार उनके यहां जांच कराने आने वाले रोगियों में प्रति माह तीन से चार मरीज कैंसर से पीड़ित आ रहे हैं। बेहतर उपचार के लिए ये मरीज दिल्ली, कानपुर सहित अन्य हायर सेंटर की ओर दौड़ लगाते हैं। जिले में बायोप्सी जांच करने वाली आधा दर्जन से अधिक पैथोलॉजी हैं।
जेके कैंसर इंस्टीट्यूट के पूर्व पैथोलॉजी विभागाध्यक्ष रहे डा. यूके श्रीवास्तव ने बताया गुटखा, पान मसाला और तंबाकू के प्रचलन से नई पीढ़ी पर कैंसर का शिकंजा कसता जा रहा है। कैंसर की समय से जानकारी ही सबसे बड़ा उपचार है। प्रथम चरण में पहचान के बाद कैंसर का इलाज आसानी से हो जाता है। इसके बाद दिक्कतें शुरू हो जाती है।
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भूगर्भ जल का प्रदूषण भी बड़ी वजह
मथुरा। भूगर्भ जल में ऑर्गेनिक, इन ऑर्गेनिक रसायनों की बढ़ती मात्रा भी कैंसर की बड़ी वजह है। पैथोलॉजी की जांचों में जल में लेड, मरकरी, कैडमियम जैसी धातुएं आ रही है। जो आखिर में कैंसर की वजह बन जाती हैं। भूगर्भ जल प्रदूषण को यमुना प्रदूषण से जोड़कर भी देखा जाता है।
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चेरीटेबिल ट्रस्ट पहुंचे 188 नए रोगी
मथुरा। डा. शीला मेमोरियल चेरीटेबिल ट्रस्ट में वर्ष 2014 में 188 नए कैंसर रोगियों का रजिस्ट्रेशन किया गया। डा. एसके शर्मा ने बताया कि कैंसर का अंतिम चरण पता लगना ही बड़ी समस्या है। कैंसर की संभावना के साथ ही चिकित्सक परामर्श आवश्यक है।
कैंसर के लक्षण
-उपचार के बाद भी घाव, गांठ का ठीक न होना
-शरीर से लगातार रक्तस्त्राव पर भी कराएं जांच
-आंतों के स्वभाव परिवर्तन, पेचिस, लूज मोशन का ठीक न होना
-पेशाब में खून का आना, जलन की समस्या
- मुंह में छाले, घाव या फिर सफेद चकत्ते भी कैंसर के लक्षण हैं।
मंडल में कैंसर रोगियों की स्थिति
जिले 2013 2014
आगरा 577 612
फीरोजाबाद 117 156
मथुरा 51 67
हाथरस 33 46
एटा 30 43
मैनपुरी 32 35