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सिविल सेवा परीक्षा में मथुरा की धाक

Sun, 05 Jul 2015 12:14 AM IST
ब्यूरो, अमर उजाला मथुरा
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संघ लोकसेवा आयोग की प्रतिष्ठित सिविल सेवा परीक्षा में इस बार जिले के तीन होनहार उत्तीर्ण हुए हैं। इनमें कान्हा नगरी के दो बेटे और एक बिटिया शामिल है। शनिवार को वर्ष-2014 की परीक्षा के अंतिम परिणाम में गोवर्धन के जोगिंदर सिंह राना, गोविंदनगर सेक्टर एफ निवासी यशपाल सिंह और गोविंद नगर निवासी देवकीनंदन शर्मा की पुत्री उमा का नाम देखकर उनके घर पर बधाई देने वालों का तांता लग गया। जोगिंदर ने सिविल सेवा परीक्षा में 419वीं, यशपाल ने 513वीं और उमा ने 520वीं रैंक पाई है। एक ओर तीनाें की उपलब्धि पर परिवार में जश्न का माहौल है, वहीं जिले के लोग भी गर्व का अनुभव कर रहे हैं।    
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किसान के बेटे की सफलता पर गांव में जश्न
जिले के गोवर्धन विकासखंड का गांव सौसा बसई शनिवार को जश्न में डूब गया। गांव के जोगिंदर सिंह राना ने सिविल सेवा परीक्षा- 2014 में 419वीं रैंक हासिल की। यह सफलता सिर्फ पढ़ाई में परिश्रम ही नहीं, जीवन के संघर्षों से लड़कर जीतने की कहानी है। गांव में जन्मा एक किसान का बेटा भी बड़े ख्वाब पूरे कर सकता है, यह जोगिंदर ने साबित कर दिया।    
गांव सौसा बसई निवासी बिज्जो प्रधान के पुत्र जोगिंदर शुरू से ही मेधावी रहे। उन्होंने प्राथमिक शिक्षा मथुरा में महोली रोड स्थित सरस्वती मॉडर्न पब्लिक स्कूल में पाई। इसके बाद इंटरमीडिएट की पढ़ाई श्रीजी बाबा सरस्वती विद्या मंदिर से पूरी की। एमिटी यूनिवर्सिटी से बीटेक की पढ़ाई पूर कर उन्होंने मल्टीनेशनल कंपनी एचसीएल में जॉब किया। मन में सिविल सर्विसेज में जाने का स्वप्न जिंदा रहने के कारण वे जॉब छोड़कर परीक्षा की तैयारी में जुट गए। दिल्ली में तैयारी के बाद जोगिंदर ने चौथे प्रयास में संघ लोक सेवा आयोग की परीक्षा में 419वीं रैंक हासिल कर अपना लक्ष्य पा लिया। हालांकि जोगिंदर सिंह बीते साल भी साक्षात्कार में शामिल हुए थे, लेकिन उस बार सफलता नहीं मिली। जोगिंदर अपनी उपलब्धि का श्रेय पिता बिज्जो प्रधान, चाचा सुखवीर सिंह, हरी सिंह, भाई नरेंद्र, सोनू, देवेंद्र और राजेश को देते हैं। युवा जोगिंदर की सफलता पर परिवारीजनों के साथ रिश्तेदार और मित्र भी खुश हैं। मथुरा-वृंदावन के विधायक प्रदीप माथुर, गोवर्धन के विधायक राजकुमार रावत, अजय सक्सेना, महाराज सिंह, राजवीर सिंह छाबरिया, पृथ्वी सिंह, बघेल सिंह, पुरुषोत्तम अग्रवाल, ललित मोहन शर्मा, सपा जिलाध्यक्ष तुलसीराम शर्मा समेत अन्य ने जोेगिंदर को बधाई दी है।
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आज होगा सम्मान
जोगिंदर सिंह राना की इस उपलब्धि पर हाइवे स्थित डिफेंस कालोनी में रविवार को शाम चार बजे उनका सम्मान किया जाएगा।


लगन से लक्ष्य तक पहुंचे यशपाल
शहर के गोविंदनगर सेक्टर एफ निवासी अधिवक्ता चौधरी धर्मवीर सिंह शनिवार को गर्वित थे। सिविल सेवा परीक्षा में बेटे की सफलता पर हर कोई बधाई देने आ रहा था। चौधरी धर्मवीर के पुत्र यशपाल ने अपने दूसरे प्रयास में संघ लोक सेवा आयोग की इस परीक्षा में 513वीं रैंक हासिल कर बता दिया कि सच्चे मन से प्रयास करें तो हर बाधा पार की जा सकती है। चार-भाई बहनों में तीसरे नंबर के यशपाल की शुरुआती पढ़ाई वृंदावन स्थित परमेश्वरी देवी धानुका सरस्वती विद्या मंदिर में हुई। जयपुर के कालेज से बीटेक करने के बाद उनकी इच्छा सिविल सर्विसेज में जाने की हुई और उन्होंने तैयारी के लिए दिल्ली का रुख किया। कड़ी मेहनत और लगन से पढ़ाई कर वे बीते साल प्रथम प्रयास में साक्षात्कार के पायदान तक पहुंच गए थे, लेकिन सफलता नहीं मिली। यशपाल ने हार न मानते हुए एक बार फिर पूरे जोश और लगन के साथ तैयारी की और 513वीं रैंक पाई। वह मार्च माह में घोषित हुए पीसीएस-2013 परीक्षा के परिणाम में उनका सेलेक्शन वाणिज्य कर अधिकारी के रुप में हो चुका है। वर्तमान में यशपाल स्टाफ सलेक्शन कमेटी के माध्यम से चयनित होकर डिफेंस में ऑडिटर पद पर कार्यरत हैं, उनकी पोस्टिंग लखनऊ में है। यशपाल ने अपनी उपलब्धि का श्रेय परिवारीजनों और गुरुजनों को दिया है। उनकी उपलब्धि पर विधायक प्रदीप माथुर, विधायक पूरन प्रकाश, विधायक राजकुमार रावत समेत अन्य ने बधाई दी है।


उमा ने बढ़ाया दो परिवारों का मान
गोविंदनगर निवासी देवकीनंदन शर्मा की लाड़ली पुत्री उमा शर्मा ने संघ लोक सेवा आयोग की परीक्षा में 520वीं रैंक हासिल की है। शुरू से ही मेधावी रही उमा ने सेंट पॉल्स से इंटरमीडिएट तक पढ़ाई की। उन्होंने दसवीं और बारहवीं की परीक्षा में भी अपने जोन में टॉप किया था। जल निगम में जूनियर इंजीनियर देवकीनंदन शर्मा बताते हैं कि 12वीं के बाद उमा ने जीएलए से बीटेक किया। वर्ष 2010 में उमा की शादी लखनऊ निवासी जर्मन कंपनी में इंजीनियर से हो गई। शादी के बाद भी उमा ने पढ़ाई और जॉब जारी रखी। इस दौरान उसका चयन इसरो में भी वैज्ञानिक पद के लिए हो गया था लेकिन ज्वाइन नहीं किया। एक विवाहित महिला के जीवन में आने वाली हर बाधा को पार करते हुए उमा शर्मा बीते साल अपने प्रथम प्रयास में साक्षात्कार तक पहुंच गई थीं, लेकिन अंतिम सूची में स्थान नहीं बना सकी। इस बार उमा ने 520वीं रैंक प्राप्त करते दो परिवारों को गौरवान्वित किया है।
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