वृद्धाश्रम में तीन निराश्रित महिलाओं की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत, 20 गंभीर
- दूषित खाना-पानी मिलने की वजह से मौत होने की चर्चा, संस्था ने बिना पोस्टमार्टम कराए शव परिवार वालों को सौंपे
- रविवार को खुला राज तो प्रशासन में मचा हड़कंप, खाद्य विभाग ने लिए सैंपल
- स्वास्थ्य विभाग ने दवाएं कराई उपलब्ध, बीमार महिलाएं सौ शैया अस्पताल में भर्ती
संवाद न्यूज एजेंसी
मथुरा। वृंदावन के नगला रामताल इलाके में हरदोई की संस्था द्वारा संचालित वृद्धाश्रम में तीन दिन में तीन निराश्रित वृद्धा माताओं की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो हो गई। इसका का रविवार को राजफाश हुआ। चर्चा है कि दूषित खाने और पानी की वजह से इनकी मौत हुई है। वहीं, आश्रम की ही अन्य 20 महिलाओं की तबीयत खराब है। इनको सौ शैया अस्पताल में भर्ती कराया गया है। डीएम के आदेश पर खाद्य विभाग ने खाने और पानी के सैंपल भरे। स्वास्थ्य विभाग ने दवाएं उपलब्ध कराईं।
जैंत इलाके में कृष्णाकुटीर के नाम से वृद्धाश्रम संचालित है। इसमें 242 महिलाएं रहती हैं। 2018 से इसे हरदोई की सार्वजनिक शिक्षो नयन संस्थान संचालित करती आ रही है। डॉ. एसके त्रिवेदी इसके अध्यक्ष हैं। 26 जुलाई को यहां रहने वाली वृद्ध महिलाओं की तबीयत बिगड़ने का सिलसिला शुरू हुआ। सबसे पहले यहां रहने वाली राजस्थान निवासी 70 वर्षीय जसकंवर की मौत हुई। 28 जुलाई को मध्यप्रदेश निवासी 70 वर्षीय कौशल्या और 29 को मध्य प्रदेश निवासी 85 वर्ष की सावित्री की मौत हो गई। कौशल्या का कोई परिवारीजन न होने के चलते उसके शव का अंतिम संस्कार संस्था ने किया। अन्य को परिजन ले गए। पोस्टमार्टम किसी का भी नहीं कराया गया। रविवार को अचानक से 20 वृद्धाओं की तबीयत और बिगड़ गई। इनको सौ शैया अस्पताल में भर्ती कराए जाने के बाद पूरे मामले का राजफाश होने पर प्रशासन में खलबली मच गई।
स्वास्थ्य विभाग ने दी क्लोरीन की गोलियां
स्वास्थ्य विभाग की ओर से आश्रम में पेयजल को साफ रखने के लिए उसमें क्लोरीन की गोलियां घोलने को दी हैं। मगर, यह दवा भी रविवार को उस वक्त दी गई, जब आश्रम की तीन महिलाओं की मौत हो चुकी थी और 20 अस्पताल में बीमारी से जूझ रही हैं।
बयान-
वृद्धाश्रम में तीन महिलाओं की मौत होने की जानकारी संस्था द्वारा दी गई है। खाद्य विभाग से वहां के पेयजल और खाने के नमूने एकत्रित कराए हैं। इनकी जांच रिपोर्ट आने के बाद ही कुछ स्पष्ट कहा जा सकेगा।
- विकास चंद्रा, डीपीओ
तीन मौतों का राज छिपाकर लापरवाही पर पर्दा डालने की कोशिश तो नहीं
- प्रशासन, स्वास्थ्य, खाद्य, नगर निगम की कार्य प्रणाली पर उठे सवाल
- संस्था के अनुसार नगर निगम द्वारा टैंकर से भेजा जा रहा पानी दूषित
मथुरा। कृष्णा कुटीर आश्रम में तीन महिलाओं की मौत ने प्रशासन को हिलाकर रख दिया है। कई सवाल खड़े हो गए हैं। सबसे बड़ी बात तो यह है कि तीन दिन में तीन मौत होने के मामले को आखिरी क्यों छिपाया गया। शवों का पोस्टमार्टम क्यों और किसने नहीं होने दिया।
आश्रम की इंचार्ज शिल्पा का कहना है कि जसकंवर को कैंसर था। कौशल्या को डायरिया और डायबिटीज था। सावित्री को हार्ट अटैक हुआ था। दूसरी ओर उन्होंने नगर निगम द्वारा आश्रम में सप्लाई किए जा रहे पेयजल को लेकर कहा कि टैंकरों द्वारा भेजा जा रहा यह जल दूषित है। तीन मौत व अन्य महिलाओं की तबीयत खराब होने के बाद पानी के सैंपल जांच के लिए दिए गए हैं। वहीं, खाद्य पदार्थों के नमूने भी जांच के लिए भेजे गए हैं। खाद्य सुरक्षा विभाग के द्वारा यह नमूने लिए गए हैं। मगर, इस सबके बीच बड़ा सवाल यह खड़ा हो रहा है कि आखिर तीन मौतों का राज क्यों छुपाया जाता रहा। स्वास्थ्य विभाग बाढ़ ग्रस्त वृंदावन के आश्रमों में लगातार स्वास्थ्य टीमों को भेज लोगों की जांच कराने का दम भर रहा है। उसके दावे यहां क्यों फेल हो गए। खाद्य विभाग की टीम को लगातार बाढ़ ग्रस्त इलाकों में खाने-पानी के सैंपल लेने की जिम्मेदारी सौंपी गई है, उसने अपनी जिम्मेदारी को समय से क्यों पूरा नहीं किया।
20 महिलाएं अभी भी गंभीर
नगला रामताल स्थित महिला आश्रय सदन कृष्णाकुटीर की काजल (55), खुशबू (80), लता पंडित (76), ओवला दासी (80), किताबो (70), कान्ता बाई (65), सावित्री देवी (60) एवं रूपन बाई (62) सहित 20 महिलाओं की तबीयत खराब है। इन सभी महिलाओं को उल्टी और दस्त की शिकायत है। महिलाओं की स्थिति गंभीर बताई जा रही है। सभी को सौ शैया अस्पताल में भर्ती कराया गया है। डॉक्टरों की टीम उनके उपचार में जुटी हुई है। सीएमओ डॉ. अजय कुमार वर्मा के अनुसार महिला आश्रय सदन कृष्णा कुटीर में पिछले तीन दिनों से महिलाओं के बीमार होना जारी है। शुक्रवार को भी 17 महिलाओं को जिला संयुक्त चिकित्सालय में भर्ती हुई हैं। इन सभी महिलाओं को भी उल्टी व दस्त हो रहे हैं।
10 दिन पहले ही आश्रम आई थी सावित्री
मृतका सावित्री को दस दिन पहले ही उनकी बेटियां आश्रम में छोड़कर गईं। उनको कोई बेटा हैं नहीं था। बेटियां ही उनकी देखरेख करती थीं। आश्रम की इंचार्ज शिल्पी ने बताया कि सावित्री की बेटियों का कहना था कि मां वृंदावन में रहने की जिद कर रही थीं। तभी उन्हें आश्रम में छोड़ने का फैसला किया था। वहीं, कौशल्या फरवरी 2023 से आश्रम में रह रही थीं। इनके पति की मौत के बाद परिवार में कोई नहीं है। जसकंवर को डेढ़ से दो साल आश्रम में हो गए। वह स्वयं यहां आई थीं। इनकी छोटी बहन शांता कुंवर राणावत भी आश्रम में इनके साथ रहती हैं।
क्या होगी मजिस्ट्रेटी जांच, नपेंगे जिम्मेदार
- शवों का पोस्टमार्टम नहीं हुआ तो कैसे साबित होगा मौतों का कारण
मथुरा। वृद्धाश्रम में तीन महिलाओं की मौत क्या राज बनकर रह जाएगी या फिर प्रशासन अब जागेगा और पूरे मामले की मजिस्ट्रेटी जांच कराएगा। जांच के संबंध में रविवार को तो प्रशासन कोई फैसला नहीं ले पाया। हालांकि सैंपलिंग कराकर खानापूर्ति होती रही।
आश्रम की इंचार्ज शिल्पा का कहना है कि जसकंवर को कैंसर था। कौशल्या को डायरिया और डायबिटीज था। सावित्री को हार्ट अटैक हुआ था। मगर, इन तीनों मौतों के कारणों का कोई स्पष्ट मेडिकल साक्ष्य नहीं है। इसके पीछे शवों का पोस्टमार्टम न कराना कारण रहा। ऐसे में अब सवाल यह भी है कि अगर इस प्रकरण की मजिस्ट्रेटी जांच होती भी है तो जांच अधिकारी किन सबूतों को अपनी जांच का आधार बनाएंगे। क्या इन मौतों के जिम्मेदारों के नाम उजागर होंगे।
20 के करीब महिलाओं की तबीयत खराब है। उनका उपचार चल रहा है। आश्रम में रह रहीं अन्य महिलाओं के लिए दवाएं उपलब्ध कराई गई हैं।
- डा. अजय कुमार वर्मा, सीएमओ
कृष्णा कुटीर में आए थे पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद
- कृष्णा कुटीर में दो महिलाओं की दूषित खान पान की वजह से हुई मौत, 24 से अधिक बीमार
संवाद न्यूज एजेंसी
वृंदावन। जिस कृष्णा कुटीर में बीमारी के चलते दो महिलाओं की मौत हो गई। करीब 24 से अधिक विधवा महिलाएं सौ शैया अस्पताल में भर्ती हैं। इसी कृष्णा कुटीर में करीब एक वर्ष पूर्व 2022 में 27 जून को तत्कालीन राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद आ चुके हैं। रामनाथ कोविंद ने यहां आश्रय पाई महिलाओं से संवाद किया था।
केंद्र व प्रदेश सरकार के महिला कल्याण निगम ने निराश्रित महिलाओं को आसरा देने को 1.4 हेक्टेयर में 57.48 करोड़ रुपए की लागत से कृष्णा कुटीर आश्रय सदन बनाया। इसका लोकार्पण 31 अगस्त 2018 को तत्कालीन महिला एवं बाल विकास राज्यमंत्री मेनका गांधी, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, तत्कालीन प्रदेश की महिला एवं बाल विकास मंत्री रीता बहुगुणा ने किया था।
यहां मिलती हैं यह सुविधाएं
कृष्णाकुटीर आश्रय सदन के डिस्पेंसरी, महिलाओं के रहने के कमरे, लिफ्ट, बाथरूम, चिकित्सक कक्ष के साथ ही किचन, भोजन, साल में दो बार वस्त्र के अलावा सदन की गैलरी, स्लैब आदि उतार चढ़ाव वाले स्थान पर स्टील की रैलिंग, हरियाली से आच्छादित बगीचा, मंदिर दर्शन के लिए वाहन की सुविधा दी जा रही है। माताओं को सुबह नाश्ता, दोपहर और शाम को भोजन, सुबह और शाम चाय के अलावा रात को दूध भी दिया जाता है।