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सत्संग से सुधरा नहीं, ताको बड़ा अभाग : सतीश चंद्र

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जयगुरूदेव आश्रम में आयोजित सत्संग मेला में उपस्थित भक्त। 
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मथुरा। हाईवे स्थित जयगुरुदेव आश्रम में आयोजित तीन दिवसीय गुरु पूर्णिमा सत्संग मेले का बृहस्पतिवार को श्रद्धा और आध्यात्मिक वातावरण के बीच समापन हो गया।
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अंतिम दिन राष्ट्रीय उपदेशक सतीश चंद्र और बाबूराम ने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए शाकाहार, सदाचार, मद्यनिषेध और आध्यात्मिक साधना के महत्व पर विचार व्यक्त किए। उन्होंने सत्संग से सुधरा नहीं, ताको बड़ा अभाग पंक्ति का उल्लेख करते हुए कहा कि जो व्यक्ति सत्संग सुनने के बाद भी अपने जीवन में सकारात्मक परिवर्तन नहीं लाता, वह अपने जीवन का महत्वपूर्ण अवसर खो देता है।
सतीश चंद्र ने अपने प्रवचन में कहा कि प्राचीन काल की लड़ाइयां सत्ता के लिए नहीं बल्कि धर्म और अधर्म के बीच होती थीं। उन्होंने कहा कि यदि समाज वास्तव में रामराज्य और सनातन मूल्यों की स्थापना चाहता है तो सबसे पहले धार्मिक स्थलों के आसपास मांस, मछली, अंडा और शराब की दुकानों को बंद करने की दिशा में प्रयास करने होंगे। उनका कहना था कि धर्मनगरी में मांसाहार और मद्यपान की बिक्री धार्मिक वातावरण के अनुकूल नहीं है और इससे संतों तथा धार्मिक परंपराओं की मर्यादा प्रभावित होती है।
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उन्होंने बाबा जयगुरुदेव महाराज के शाकाहार, सदाचार और मद्य निषेध के संदेश का उल्लेख करते हुए कहा कि इन मूल्यों को अपनाकर ही समाज में वास्तविक सुख, शांति और सद्भाव स्थापित किया जा सकता है। बाबूराम ने भी आध्यात्मिक साधना और गुरु के मार्गदर्शन को जीवन का आधार बताते हुए श्रद्धालुओं से नियमित सत्संग और ध्यान करने का आह्वान किया। उनके अनुसार जब मनुष्य हिंसा, नशे और भोग की प्रवृत्तियों में फंस जाता है, तब संत-महात्मा उसे धर्म, संयम और सदाचार का मार्ग दिखाने के लिए समाज में आते हैं। समापन अवसर पर संस्थाध्यक्ष पंकज महाराज ने गुरु पूर्णिमा महोत्सव के संपन्न होने की घोषणा करते हुए सभी का आभार व्यक्त किया। उन्होंने बताया कि मेले के दौरान दर्जनों दहेज रहित विवाह संपन्न कराए गए। सत्संग के उपरांत श्रद्धालु धर्म प्रचार और सुरत शब्द योग साधना का संकल्प लेकर अपने-अपने घरों को लौट गए।
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