मथुरा में सड़क हादसों का ग्राफ घटने की बजाय और बढ़ा है। यहां 6 माह में 47.4 प्रतिशत की वृद्धि देखी गई। सुप्रीम कोर्ट कमेटी ऑन रोड सेफ्टी ने इस पर चिंता जताई है।
उत्तर प्रदेश के मथुरा में वर्ष 2023 के छह माह में सड़क हादसों में 47.4 प्रतिशत की वृद्धि देखी गई है। इस पर सुप्रीम कोर्ट कमेटी ऑन सेफ्टी के अध्यक्ष सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति अभय मनोहर सप्रे ने चिंता व्यक्त की। उनकी अध्यक्षता में सड़क सुरक्षा पर बैठक सोमवार को सर्किट हाउस पर हुई। वहीं आगरा में सड़क दुर्घटना के आंकड़ों में कुछ राहत है, तो साथ में चिंता भी है। मंडल में वर्ष 2021 के मुकाबले वर्ष 2022 में सड़क दुर्घटना के दौरान होने वाली मृत्यु के ग्राफ में गिरावट आई है।
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सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति अभय मनोहर सप्रे ने बताया कि वर्ष 2021 में आगरा मंडल के आगरा जिले में 549, फिरोजाबाद में 392, मैनपुरी में 410 और मथुरा में 467 लोगों की जान सड़क दुर्घटना के दौरान गई थी। 1817 लोगों की मृत्यु हुई थी। जबकि वर्ष 2022 में आगरा के अंदर 548, फिरोजाबाद में 358, मैनपुरी में 339 और मथुरा में 471 लोग सड़क दुर्घटना में मारे गए।
मंडल में कुल 716 लोगों की मृत्यु दर्ज की गई। इस हिसाब से 5.6 प्रतिशत की कमी देखने को मिली। जबकि वर्ष 2023 के जनवरी से जून माह तक की समीक्षा की गई। इसमें मथुरा के आंकड़े चिंता वाले सामने आए। यहां पर पिछले छह माह में सड़क दुर्घटना के दौरान मरने वालों के ग्राफ में 47.4 प्रतिशत की वृद्धि देखने को मिली है। उन्होंने निर्देश दिए है कि जन-जागरूकता के लिए व्यापक अभियान चलाया जाना चाहिए।
सड़क दुर्घटना में घायलों की मदद के लिए लोगों को जागरूक करना चाहिए। हर साल जापान में 4 हजार लोगों की मौत सड़क दुर्घटना में होती है, तो भारत में यह संख्या 1.5 लाख से अधिक है। एनएचआई और लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों को ब्लैक स्पॉट पर व्यवस्था सुधार का, तो घायलों को तत्काल चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने की व्यवस्था करने का निर्देश भी दिया।