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Mathura News: श्रीजी मंदिर जैसी ही निर्माण कला से बना था राम-राम और बैच्छोर का मंदिर

Fri, 02 Jun 2023 12:53 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, मथुरा
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- योगेश्वर श्री कृष्ण जन्मस्थान सेवा संघ ट्रस्ट का दावा, ओरछा के राजा वीर सिंह बुंदेला ने बसंत पंचमी को ही श्री कृष्ण जन्मस्थान मंदिर के अलावा अन्य मंदिरों को निर्माण कराया था
संवाद न्यूज एजेंसी
मथुरा। राम-राम और बैच्छोर के जिन श्री विग्रहों को आगरा की बेगम साहिबा मस्जिद की सीढि़यों में दबवा देने का दावा किया जा रहा है, उस मंदिर का निर्माण बरसाना के श्रीजी मंदिर के साथ बंसत पंचमी को शुरू हुआ था। यह निर्माण ओरछा के राजा वीर सिंह बुंदेला ने ही कराया था और निर्माण कला में भी समानता है। यह दावा टीम योगेश्वर श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा संघ ट्रस्ट ने किया है। उनका कहना है कि ओरछा के राजा वीर सिंह बुंदेला ने केवल श्रीकृष्ण जन्मस्थान मंदिर ही नहीं अपितु मथुरा के श्रीजी मंदिर के अलावा ब्रज तथा देश के अन्य हिस्सों में भी मंदिरों का निर्माण कराया था। वे कई पुस्तकों से जुटाई इस जानकारी को अपने केस की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट में पेश करेंगे।
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योगेश्वर श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा संघ ट्रस्ट द्वारा ईदगाह की अष्टभुजीय आकृति पर दावा किया गया है तथा कहा गया है कि यह मंदिर होने का आधार है। इसी आधार पर औरंगजेब ने ईदगाह का निर्माण कराया था। उन्होंने बताया कि श्रीकृष्ण जन्मभूमि मंदिर को सन 1618 ई में ओरछा के राजा वीरदेव सिंह बुंदेला ने बसंत पंचमी के दिन बनवाना प्रारंभ करवाया था। इसी दिन देश के अलग-अलग स्थानों पर 51 अन्य मंदिरों के निर्माण कार्य का शुभारंभ किया गया था, जिसमें बरसाना का राधारानी मंदिर भी शामिल है, जिसे श्रीजी या लाडली जी के मंदिर के नाम से भी जानते हैं। वृंदावन का वनखंडी महादेव मंदिर भी उन्हीं मंदिरों में से एक है। इसके अलावा जिन मंदिरों का निर्माण इसी दिन शुरू हुआ उनमें ब्रह्म कुंड, इमला घाट (इमली ताल), व्यास बाग, बुंदेला बाग, चतुर्नन बाग, फुतेला बाग के अलावा राजमंदिर ( रॉयल पैलेस-ओरछा का किला), ओरछा मध्यप्रदेश, जहांगीर महल, ओरछा, चतुर्भुज मंदिर( विष्णु मंदिर) मध्यप्रदेश, सतखंडा महल, दतिया, करेरा किला, झांसी का किला, धामोनी का किला शामिल हैं। पक्षकार ट्रस्ट के अध्यक्ष एडवोकेट अजय प्रताप सिंह ने बताया कि उनके द्वारा यह तथ्य कोलकाता की प्रेसीडेंसी यूनिवर्सिटी के इतिहास के विभाग के प्रोफेसर डाॅ. सलीम जावेद की रिसर्च द मोनूमेंटल इंडियन जनरल ऑफ आर्कियोलॉजी वाल्यूम- 6 से लिया है, जिसका शीर्षक द मोनूमेंटर रिमेंस ऑफ द बुंदेला राजपूत इन है। कई तथ्य उन्होंने एफएस ग्राउस की पुस्तक से भी जुटाए हैं। इन सभी तथ्यों को अपने केस में हाईकोर्ट में पेश करेंगे।
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लाल पत्थर का किया गया प्रयोग
पक्षकार का दावा है कि इन सभी मंदिरों में एक ही प्रकार के लाल रंग के पत्थर का प्रयोग किया गया है। दावा है कि इन मंदिरों के टूटे हुए अवशेष ईदगाह के निर्माण में भी प्रयोग किए गए हैं।
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