मथुरा। छाता में पिछले 14 साल बंद पड़ी चीनी मिल का नवीन निर्माण विकास की कई संभावनाओं के द्वार खोलेगा। पिछली गलतियों से सबक लेते हुए इस मिल को पूरी तरह आत्मनिर्भर बनाया जा रहा है। मिल में फिलहाल 60 किलो लीटर प्रति दिन (केएलपीडी) क्षमता की डिस्टलरी एवं लॉजिस्टिक हब-वेयरहाउसिंग कॉम्पलेक्स की स्थापना भी होगी।
डिस्टलरी से एथेनाॅल बनाया जाएगा, जिसका उपयोग बायो फ्यूल बनाने में किया जाएगा। इससे बिजली भी बनाई जाएगी, जो कि जरूरत पड़ने पर मिल के संचालन में काम आएगी।
कैबिनेट मंत्री चौधरी लक्ष्मीनारायण ने बताया कि मिल की कनेक्टिविटी को देखते हुए इसमें लॉजिस्टिक हब भी बनाया जाएगा। जेवर में प्रस्तावित एयरपोर्ट नजदीक होने की वजह से लॉजिस्टिक हब को उद्यमियों को किराए पर देकर अतिरिक्त आय की व्यवस्था हो सकेगी।
उन्होंने बताया कि पुरानी मिल बनी तब शेरगढ़ के पास पुल नहीं था। ऐसे में गन्ने की आवक कम थी, लेकिन अब पुल बन चुका है। किसानों को मिल में गन्ना लाने के लिए कोई परेशानी नहीं होगी। अब गोवर्धन व छाता के अलावा मांट और आगरा के अछनेरा के किसान भी यहां गन्ना ला सकेंगे। इससे प्रतिदिन 30-35000 क्विंटल गन्ना पिराई हो सकेगी।
5000 टीडीसी तक होगा क्षमता विस्तार
कैबिनेट मंत्री ने बताया कि इस मिल को फिलहाल 3000 टीसीडी क्षमता के अनुरूप बना रहे हैं, लेकिन जैसे-जैसे गन्ने की आवक बढ़ेगी इसकी क्षमता 5000 टीडीसी तक करेंगे। इस मिल के बनने से करीब सवा लाख किसान लाभान्वित होंगे। उन्होंने बताया कि पहले जनपद में 44000 हेक्टेयर में गन्ना बोया जाता था, जिसे अब एक लाख हेक्टेयर तक ले जाएंगे ताकि मिल को पर्याप्त गन्ना मिल सके। इसके साथ ही गन्ने की आवक को देखते हुए डिस्टलरी की क्षमता भी 60 से 120 केएलपीडी कर सकेंगे।
क्षेत्रीय युवाओं को मिलेगा रोजगार
मिले बनने के बाद सीनियर स्टाफ तो शुरुआत में प्रशिक्षित रखे जाएंगे, जो बाहर से हो सकते हैं। योग्य कर्मचारी यहां उपलब्ध होंगे तो उन्हें भी लिया जा सकेगा, लेकिन सहायक स्टाफ के तौर पर जितने भी कर्मियों की जरूरत रहेगी उनमें स्थानीय को ही वरीयता दी जाएगी। इस लिहाज से पूरे प्लांट में सैकड़ों रोजगार सृजित होंगे।