छाता। कस्बे के धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व वाले चंद्र कुंड की दुर्दशा से स्थानीय लोगों और युवाओं में गहरा आक्रोश है। देखरेख के अभाव में यह पवित्र स्थल गंदगी के ढेर में तब्दील हो गया है। लोगों ने नगर पंचायत प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि नगर पंचायत प्रशासन इस एतिहासिक कुंड का इस्तेमाल डंपिंग यार्ड के रूप में कर रहा है।
स्थानीय निवासियों का आरोप है कि प्रशासन को इस कुंड की याद केवल दीपावली के अवसर पर आयोजित दीपदान कार्यक्रम के समय आती है, जिसके बाद इसे उपेक्षित छोड़ दिया जाता है। नगर पंचायत के कर्मचारी प्रतिदिन शहर का कूड़ा कुंड के समीप डालकर उसमें आग लगा देते हैं, जिससे उठने वाले जहरीले धुएं और गंदगी के कारण आसपास रहना दूभर हो गया है। यहां संक्रामक बीमारियों के फैलने का खतरा भी मंडरा रहा है। कुंड की बदहाली को क्षेत्र की छवि के लिए घातक बताते हुए युवाओं ने प्रशासन को चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही सफाई और सौंदर्यीकरण के ठोस कदम नहीं उठाए गए तो क्षेत्र के लोग उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होंगे। इस दौरान मुकेश (मुक्कन पहलवान), विजय बहादुर, भगवान, प्रेमपाल, रामजीत, माधव शर्मा, अजीत, रोहित, पीतम, भोला, मनु ठाकुर, लालसिंह, विशाल सिंह, कान्हा ठाकुर, चीनू, लेखराज और चिंटू सहित अनेक नागरिक उपस्थित रहे।